भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में नियमों के विपरीत संचालित हो रही गैर-औद्योगिक गतिविधियों पर प्रशासन सख्ती करने की तैयारी में है। औद्योगिक क्षेत्र में निर्धारित नियमों के अनुसार विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी इकाइयों का संचालन किया जाना चाहिए, लेकिन लंबे समय से यहां शोरूम, बड़े सर्विस सेंटर और गोदाम जैसी गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है। अब जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीआईसी) ने इस मामले में कार्रवाई तेज करने का रुख अपनाया है।
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में नियमों के पालन पर जोर
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र भोपाल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे क्षेत्रों में भूखंडों का आवंटन सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय निर्धारित औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इनका उद्देश्य विनिर्माण इकाइयों को स्थान उपलब्ध कराना, उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देना और औद्योगिक विकास के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित करना होता है।
औद्योगिक भूखंड आवंटित करते समय संबंधित नियमों और शर्तों का पालन करना आवश्यक होता है। यदि किसी भूखंड का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्य से अलग गतिविधि के लिए किया जाता है, तो संबंधित विभाग आवंटन की शर्तों के आधार पर जांच और कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, किसी इकाई के खिलाफ अंतिम कार्रवाई से पहले उसके दस्तावेजों, स्वीकृत उपयोग और लागू नियमों की जांच महत्वपूर्ण होती है।
21 इकाइयों का आवंटन निरस्त
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र ने अब तक करीब 21 गैर-औद्योगिक इकाइयों का आवंटन निरस्त किया है। यह कार्रवाई औद्योगिक क्षेत्र में निर्धारित उपयोग से अलग गतिविधियां संचालित होने के मामलों को लेकर की गई है।
आवंटन निरस्त होने का अर्थ संबंधित भूखंड के आवंटन पर प्रशासनिक कार्रवाई होना है। हालांकि, प्रत्येक मामले में कार्रवाई का आधार, आदेश की तारीख, संबंधित इकाई का नाम और आगे की प्रक्रिया अलग हो सकती है। उपलब्ध जानकारी में इन 21 इकाइयों की पूरी सूची या प्रत्येक मामले में अपनाई गई प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया गया है।
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में करीब 21 इकाइयों का आवंटन निरस्त किए जाने और अगले महीने आगे कार्रवाई की तैयारी से स्पष्ट है कि गैर-औद्योगिक गतिविधियों के मुद्दे पर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी जांच में कितनी इकाइयां दायरे में आती हैं और उनके संबंध में क्या निर्णय लिए जाते हैं।
फिलहाल, विभाग की ओर से तैयार की गई कार्रवाई की रूपरेखा के विस्तृत ब्योरे और संबंधित आदेशों की जानकारी सामने आना बाकी है। आधिकारिक आदेशों और जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा कि किन गतिविधियों को नियमों के विपरीत पाया गया है और संबंधित संस्थानों पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।





