भोपाल। देशभर में दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम की विजय की स्मृति में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के धमनार गांव में दशहरे का उत्सव एक खास सामाजिक संदेश के साथ जुड़ा हुआ है। यहां रावण दहन के साथ गंदगी को भी एक बुराई मानकर उससे दूर रहने का संकल्प दोहराया जाता है। गांव में घरों और आंगनों की साफ-सफाई को महत्व दिया जाता है और स्वच्छता के आधार पर परिवारों को सम्मानित करने की परंपरा निभाई जाती है।

दशहरे पर स्वच्छ घरों को किया जाता है पुरस्कृत
धमनार गांव में दशहरे के अवसर पर घरों की साफ-सफाई को लेकर विशेष उत्साह रहता है। गांव के लोग अपने घरों और आंगनों की सफाई करते हैं। घरों के बाहर रंगोली सजाई जाती है, जिससे गांव का वातावरण उत्सवी दिखाई देता है। इस दौरान घरों की स्वच्छता को परखने की परंपरा भी निभाई जाती है।
जिन घरों में बेहतर साफ-सफाई और स्वच्छ वातावरण दिखाई देता है, उन्हें सम्मानित किया जाता है। स्वच्छता की इस प्रतिस्पर्धा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले परिवारों को पुरस्कार दिए जाते हैं। यह सम्मान रावण दहन के समय प्रदान किया जाता है, जिससे धार्मिक उत्सव के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी जुड़ जाता है।
इस परंपरा का उद्देश्य केवल सबसे साफ घर चुनना नहीं है, बल्कि पूरे गांव में स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना है। जब घरों की सफाई को सामाजिक सम्मान से जोड़ा जाता है, तो लोगों को अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने के लिए प्रेरणा मिलती है।
वर्ष 1965 में हुई थी पहल की शुरुआत
धमनार में स्वच्छता से जुड़ी इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1965 से जुड़ी बताई जाती है। उस समय किसान नेता हीरालाल धाकड़ गांव के सरपंच बने थे। उस दौर में देश के कई हिस्सों में प्लेग जैसी गंभीर बीमारी को लेकर चिंता बनी हुई थी। गांवों में स्वास्थ्य और साफ-सफाई की स्थिति भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण विषय थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों ने हीरालाल धाकड़ को बताया था कि गंदगी और अस्वच्छ परिस्थितियां बीमारियों के फैलने में भूमिका निभा सकती हैं। इस जानकारी ने गांव में सफाई को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया। इसके बाद स्वच्छता को केवल व्यक्तिगत आदत के बजाय सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में प्रोत्साहित करने की पहल की गई।
दशहरे जैसे सामूहिक पर्व को इस उद्देश्य से जोड़ना एक व्यावहारिक तरीका बना। त्योहार के दौरान गांव के लोग पहले से ही एक साथ जुटते हैं। ऐसे अवसर पर घरों की साफ-सफाई को महत्व देना और अच्छे प्रयासों को सम्मानित करना स्वच्छता के संदेश को अधिक लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।
रावण दहन के साथ गंदगी के खिलाफ संकल्प
दशहरे पर रावण दहन को परंपरागत रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। धमनार में इसी विचार को स्वच्छता से जोड़ने का प्रयास किया गया है। जिस तरह रावण दहन के माध्यम से अहंकार और अधर्म जैसी बुराइयों से दूर रहने का संदेश दिया जाता है, उसी तरह गंदगी को भी ऐसी समस्या के रूप में देखा जाता है, जिसे सामूहिक प्रयास से कम किया जा सकता है।
गंदगी का असर केवल किसी एक घर तक सीमित नहीं रहता। यदि आसपास कचरा जमा हो, नालियों की सफाई न हो या पानी और कचरे का उचित प्रबंधन न किया जाए, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए घर की सफाई के साथ आसपास की गलियों और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता भी जरूरी है।
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का धमनार गांव दशहरे को स्वच्छता के संदेश से जोड़कर एक अलग पहचान प्रस्तुत करता है। वर्ष 1965 में शुरू हुई यह पहल पिछले 58 वर्षों से परंपरा के रूप में निभाई जा रही है। दशहरे पर घरों और आंगनों की सफाई, रंगोली सजाने तथा सबसे स्वच्छ घरों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार देने की व्यवस्था इस आयोजन का प्रमुख हिस्सा है।
धमनार की यह परंपरा बताती है कि सामाजिक बदलाव के लिए स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी लंबे समय तक लोगों को प्रेरित कर सकते हैं। रावण दहन के साथ गंदगी के खिलाफ संकल्प लेने का संदेश स्वच्छता को केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदत बनाने की प्रेरणा देता है। यही इस गांव के दशहरा उत्सव की विशेषता है।




