भारत-चीन सीमा पर तनाव बरकरार: अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ आमने-सामने की स्थिति, ITBP ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक से बढ़ाएगी ताकत

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भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति बने रहने की पुष्टि की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, असफिला जैसे संवेदनशील इलाकों में दोनों पक्षों की मौजूदगी और सीमा संबंधी धारणाओं को लेकर तनाव बना हुआ है।

अरुणाचल प्रदेश में आमने-सामने की स्थिति पर क्या बोले ITBP महानिदेशक?

रिपोर्ट के मुताबिक, ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में चीनी सैनिकों के साथ जारी आमने-सामने की स्थिति का उल्लेख किया। असफिला जैसे क्षेत्रों में चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई है। बताया गया है कि कुछ स्थानों पर चीनी सैनिक भारत की ओर से समझी जाने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब, लगभग छह से सात किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद रहे हैं।

सीमा विवाद की जटिलता का एक प्रमुख कारण यह है कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा का पूरा सीमांकन परस्पर सहमति से नहीं हुआ है। कई क्षेत्रों में दोनों देशों की सीमा संबंधी धारणाएं अलग-अलग हैं। इसी वजह से गश्त के दौरान सैनिकों का आमना-सामना हो सकता है और स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा हो सकता है।

3,488 किलोमीटर लंबी LAC की सुरक्षा में ITBP की भूमिका

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद की गई थी। इस बल की प्रमुख जिम्मेदारियों में भारत-चीन सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, गश्त और सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। ITBP को कठिन पहाड़ी इलाकों, अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और ऊंचाई पर काम करने की परिस्थितियों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा की लंबाई सामान्यतः लगभग 3,488 किलोमीटर बताई जाती है। यह सीमा लद्दाख से लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरती है। हर क्षेत्र की चुनौतियां अलग हैं। कहीं बर्फ से ढके पहाड़ हैं, तो कहीं घने जंगल, दुर्गम घाटियां और सीमित सड़क संपर्क वाले इलाके हैं।

गलवान घाटी की घटना से मिली तैयारी की सीख

भारत-चीन सीमा पर सैन्य तैयारियों की चर्चा करते समय जून 2020 की गलवान घाटी की घटना का उल्लेख महत्वपूर्ण है। उस समय दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारतीय और चीनी पक्ष के सैनिकों की जान गई थी। इस घटना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव की गंभीरता और सीमा प्रबंधन की चुनौतियों को सामने रखा था।

गलवान की घटना के बाद भारत ने सीमा क्षेत्रों में निगरानी, बुनियादी ढांचे, संचार और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर अधिक ध्यान दिया। ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात जवानों के लिए प्रशिक्षण, उपकरणों की उपलब्धता और आपात परिस्थितियों में प्रतिक्रिया देने की क्षमता महत्वपूर्ण बनी हुई है।

ITBP के जवान कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में काम करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। उनकी तैयारी में शारीरिक क्षमता, दुर्गम भूभाग में आवाजाही, निगरानी और विपरीत परिस्थितियों में काम करने जैसे पहलू शामिल होते हैं। आधुनिक तकनीक को इन क्षमताओं के साथ जोड़ने से सीमा पर तैनात कर्मियों को अधिक जानकारी और बेहतर परिस्थितिजन्य समझ मिल सकती है।

कुल मिलाकर, अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट और ITBP की ड्रोन क्षमता बढ़ाने की योजना भारत-चीन सीमा सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाती है। आने वाले समय में इन तैयारियों की वास्तविक प्रगति, आधिकारिक बजट विवरण और सीमा पर तैनाती से संबंधित पुष्ट सूचनाएं यह समझने में मदद करेंगी कि आधुनिक तकनीक भारतीय सीमा सुरक्षा व्यवस्था को किस हद तक मजबूत बना रही है।

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