भोपाल। भोजताल कैचमेंट एरिया के दायरे में आने वाले 78 से अधिक गांवों के किसानों ने अपनी कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान शुक्रवार को भोपाल के शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित बदलाव पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। किसानों की प्रमुख मांग है कि उनकी जमीन को कृषि श्रेणी में ही रखा जाए, ताकि खेती और उससे जुड़ी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे किसान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारतीय किसान संघ की तहसील हुजूर इकाई के नेतृत्व में किसान शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे शाहपुरा स्थित टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखीं और ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित भू-उपयोग परिवर्तन का विरोध दर्ज कराया।
किसानों का प्रतिनिधित्व भारतीय किसान संघ की हुजूर तहसील इकाई ने किया। इस दौरान संगठन की ओर से यह मांग प्रमुखता से उठाई गई कि भोजताल कैचमेंट एरिया के अंतर्गत आने वाली उनकी कृषि भूमि का दर्जा कृषि श्रेणी में ही बरकरार रखा जाए।
अखिलेश मीणा ने उठाए किसानों के जमीन संबंधी अधिकारों के सवाल
भारतीय किसान संघ की तहसील हुजूर इकाई के अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने कहा कि कैचमेंट एरिया से जुड़े प्रावधानों का सीधा असर किसानों के जमीन संबंधी अधिकारों पर पड़ सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी निर्णय से पहले किसानों की वास्तविक स्थिति और उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
किसानों की मांग का मुख्य उद्देश्य अपनी जमीन के कृषि उपयोग को बनाए रखना है। उनका कहना है कि भूमि से जुड़े नियमों और योजनाओं को लागू करते समय उन परिवारों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जिनकी आजीविका खेती पर निर्भर है।
अखिलेश मीणा की ओर से उठाया गया मुद्दा केवल जमीन के वर्गीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं से भी है। किसानों के लिए कृषि भूमि उत्पादन का साधन होने के साथ-साथ उनकी नियमित आय का आधार भी होती है।
क्या है भोजताल कैचमेंट एरिया का महत्व?
भोजताल भोपाल की प्रमुख जल संरचनाओं में शामिल है। इसके जलग्रहण क्षेत्र यानी कैचमेंट एरिया का संबंध झील में पानी पहुंचाने वाली प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था और आसपास के भूभाग से होता है। किसी जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में भूमि के उपयोग, निर्माण गतिविधियों और प्राकृतिक जल प्रवाह से जुड़े निर्णय पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा का पानी विभिन्न प्राकृतिक रास्तों से होकर जलाशय तक पहुंचता है। यदि इन क्षेत्रों में भूमि के उपयोग में बदलाव होता है, तो उसके प्रभावों का आकलन जल निकासी, मिट्टी के कटाव, पानी के प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन जैसे पहलुओं के आधार पर किया जा सकता है।
किसानों की मांग है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग कृषि श्रेणी में ही बरकरार रखा जाए। इस मामले में आगे का निर्णय प्रस्ताव के वास्तविक प्रावधानों, लागू नियमों और संबंधित विभागों की समीक्षा पर निर्भर करेगा। फिलहाल किसान अपनी मांग पर कायम हैं और प्रशासन की ओर से स्पष्टता मिलने का इंतजार कर रहे हैं।






