छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अहम फैसला, जुड़वा बच्चों की देखभाल के लिए महिला जेल प्रहरी को मिली 80 दिन की अतिरिक्त छुट्टी

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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जुड़वा बच्चों की कम उम्र और उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर केंद्रीय जेल में पदस्थ महिला प्रहरी मंदा तिवारी को 80 दिन की अतिरिक्त बाल देखभाल छुट्टी देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने 16 अक्टूबर को पारित आदेश में बच्चों की देखभाल और उन्हें आवश्यक समय देने की जरूरत को महत्वपूर्ण माना। अदालत के निर्देश के बाद महिला कर्मचारी को पहले स्वीकृत छुट्टी के अतिरिक्त 80 दिन की छुट्टी प्रदान की गई है।

मंदा तिवारी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कुल 120 दिन की बाल देखभाल छुट्टी दिए जाने की मांग की थी। इससे पहले सक्षम अधिकारी ने 1 अक्टूबर 2026 के आदेश के तहत उन्हें केवल 20 दिन की छुट्टी मंजूर की थी। महिला कर्मचारी की मांग और बच्चों की परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने अतिरिक्त छुट्टी देने का निर्देश दिया।

क्या है पूरा मामला?

मंदा तिवारी बिलासपुर केंद्रीय जेल में महिला प्रहरी के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ उन्हें अपने जुड़वा बच्चों की देखभाल भी करनी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्चों की कम उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उन्हें अतिरिक्त समय और देखभाल की आवश्यकता थी।

इसी परिस्थिति को देखते हुए मंदा तिवारी ने बाल देखभाल छुट्टी के लिए आवेदन किया था। उनकी मांग कुल 120 दिन की छुट्टी की थी, ताकि वह बच्चों की देखभाल के लिए पर्याप्त समय दे सकें।

हालांकि, सक्षम अधिकारी ने 1 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से उन्हें केवल 20 दिन की छुट्टी स्वीकृत की। महिला कर्मचारी की ओर से मांगी गई छुट्टी और स्वीकृत अवधि के बीच अंतर होने के कारण उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिका में बाल देखभाल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए छुट्टी की अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी। मामले पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें अतिरिक्त 80 दिन की छुट्टी देने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ का आदेश

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने की। अदालत ने 16 अक्टूबर को अपना आदेश पारित किया।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत ने जुड़वा बच्चों की कम उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए महिला कर्मचारी को अतिरिक्त बाल देखभाल छुट्टी देने की आवश्यकता को स्वीकार किया।

हाई कोर्ट ने पहले से स्वीकृत 20 दिन की छुट्टी के अतिरिक्त 80 दिन की छुट्टी प्रदान करने का निर्देश दिया। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को आदेश के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही करने के लिए कहा।

इस निर्णय से मंदा तिवारी को बच्चों की देखभाल के लिए पहले की तुलना में अधिक समय मिल सकेगा। हालांकि, आदेश के तहत छुट्टी की अवधि और उसके क्रियान्वयन से जुड़ी औपचारिकताएं संबंधित विभागीय प्रक्रिया के अनुसार पूरी की जानी होंगी।

क्या यह फैसला अन्य कर्मचारियों के लिए भी उदाहरण है?

मंदा तिवारी के मामले में हाई कोर्ट का आदेश बाल देखभाल छुट्टी से जुड़े विवादों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि छुट्टी से संबंधित मामलों में कर्मचारी की परिस्थितियों और बच्चों की जरूरतों को न्यायिक विचार के दौरान महत्व मिल सकता है।

हालांकि, इस आदेश से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रत्येक कर्मचारी को मांग के अनुसार निश्चित अवधि की बाल देखभाल छुट्टी मिलना अनिवार्य है। छुट्टी की स्वीकृति संबंधित सेवा नियमों, पात्रता और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

यदि किसी अन्य कर्मचारी को छुट्टी संबंधी समस्या होती है, तो उसके मामले में लागू नियमों और उपलब्ध कानूनी उपायों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जाएगा।

इसलिए इस निर्णय को मंदा तिवारी के मामले में पारित आदेश के रूप में समझना उचित होगा। इससे संबंधित विभागों के लिए भी अदालत के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही करना महत्वपूर्ण है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर केंद्रीय जेल में पदस्थ महिला प्रहरी मंदा तिवारी को जुड़वा बच्चों की कम उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को देखते हुए 80 दिन की अतिरिक्त बाल देखभाल छुट्टी देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने 16 अक्टूबर को यह आदेश पारित किया।

मंदा तिवारी ने कुल 120 दिन की छुट्टी की मांग की थी, लेकिन सक्षम अधिकारी ने 1 अक्टूबर 2026 को केवल 20 दिन की छुट्टी मंजूर की थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने पहले स्वीकृत छुट्टी के अतिरिक्त 80 दिन की छुट्टी प्रदान करने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया।

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