लखनऊ :उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर और अयोध्या आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक के पहले दिन शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में रामभक्तों पर हुई गोलीबारी का उल्लेख किया।

अमित शाह ने इस ऐतिहासिक घटना को राम मंदिर निर्माण से जोड़ते हुए भाजपा के राजनीतिक संकल्प और उपलब्धियों को सामने रखा। उन्होंने विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, से सवाल किया कि रामभक्तों पर गोली चलने की घटना से जुड़ी राजनीतिक विरासत रखने वाले लोग किस आधार पर दोबारा सत्ता में आने की बात करते हैं।
30 अक्टूबर 1990 की घटना का जिक्र कर सपा पर निशाना
अमित शाह ने अपने भाषण में 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी का मुद्दा उठाया। उस समय अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन अपने महत्वपूर्ण दौर में था और बड़ी संख्या में रामभक्त मंदिर निर्माण की मांग को लेकर वहां पहुंचे थे।
उस दौर में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार थी। अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई की गई थी। गोलीबारी में लोगों की मौत हुई थी, जिसकी स्मृति राम मंदिर आंदोलन से जुड़े राजनीतिक विमर्श में आज भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
अमित शाह ने इसी घटना का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी की राजनीतिक विरासत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने रामभक्तों की आस्था से जुड़े संकल्प को पूरा करते हुए अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।
राम मंदिर निर्माण को भाजपा की उपलब्धि के रूप में पेश किया
अमित शाह के भाषण का प्रमुख हिस्सा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर था। उन्होंने भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे राम मंदिर संबंधी संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने रामभक्तों की आस्था का सम्मान किया है।
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारतीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण और लंबे समय तक चर्चा में रहे मुद्दों में से एक रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान यह विषय भाजपा की राजनीति और चुनावी घोषणाओं का भी प्रमुख हिस्सा रहा।
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद में अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने विवादित भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठित करने का निर्देश दिया और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि देने की व्यवस्था की। इसके बाद राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
समाजवादी पार्टी की राजनीतिक विरासत पर सवाल
अमित शाह ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी को निशाने पर रखते हुए रामभक्तों पर गोली चलने की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इस घटना से जुड़ी राजनीतिक विरासत रखने वाले दल जनता से दोबारा सरकार बनाने के लिए किस आधार पर समर्थन मांगते हैं।
यह बयान उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष को भी दर्शाता है। दोनों दल राज्य की राजनीति में प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए एक-दूसरे की नीतियों, फैसलों तथा ऐतिहासिक भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
भाजपा राम मंदिर आंदोलन को अपनी राजनीतिक और वैचारिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी अपनी राजनीति में सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और अन्य सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को प्रमुखता देती रही है।
लखनऊ की बैठक में भाजपा की चुनावी रणनीति पर जोर
भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई की दो दिवसीय कार्यसमिति बैठक का उद्देश्य संगठन की गतिविधियों, राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी चुनावों की तैयारियों पर चर्चा करना है। लखनऊ में आयोजित इस बैठक में पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को राजनीतिक दिशा देने पर जोर दिया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए भाजपा के लिए संगठन को मजबूत रखना, सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना और विपक्ष के आरोपों का जवाब देना महत्वपूर्ण विषय हैं।
कार्यसमिति की बैठकें आम तौर पर संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा, चुनावी रणनीति, सरकार के कार्यक्रमों के प्रचार और आगामी राजनीतिक गतिविधियों की योजना बनाने के लिए आयोजित की जाती हैं।
2027 के चुनाव में राम मंदिर कितना महत्वपूर्ण मुद्दा होगा?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राम मंदिर, कानून-व्यवस्था, विकास, रोजगार, किसानों की समस्याएं और सामाजिक समीकरण जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भाजपा के लिए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। पार्टी इसे सांस्कृतिक आस्था और लंबे समय से किए गए राजनीतिक संकल्प की पूर्ति से जोड़ती है।
वहीं, विपक्षी दल सरकार की नीतियों, रोजगार, महंगाई, सामाजिक न्याय और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देते रहे हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में मतदाताओं के सामने कई मुद्दे होंगे और उनका प्रभाव क्षेत्र तथा सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
30 अक्टूबर 1990 की अयोध्या गोलीबारी का मुद्दा उठाकर अमित शाह ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास को 2027 के विधानसभा चुनावों से जोड़ने का प्रयास किया है। भाजपा इसे अपने लंबे राजनीतिक संकल्प की पूर्ति के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि सपा पर इस ऐतिहासिक घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आने वाले महीनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की चुनावी बहस में किस तरह स्थान बनाता है, इस पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर रहेगी।




