यूथ कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई: इंडी गठबंधन की रैली में शामिल नहीं होने पर 200 से अधिक सदस्य निलंबित, संख्या 500 तक पहुंचने की आशंका

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नई दिल्ली। कांग्रेस के युवा संगठन इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) में इन दिनों संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को आयोजित इंडी गठबंधन की रैली में शामिल नहीं होने वाले 215 पदाधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, मध्य प्रदेश, झारखंड और हिमाचल प्रदेश की इकाइयों के पदाधिकारियों पर हुई है। पार्टी नेतृत्व ने संबंधित पदाधिकारियों को निलंबन पत्र जारी कर अनुपस्थित रहने का कारण बताने के लिए कहा है।

इस कार्रवाई के बाद यूथ कांग्रेस के भीतर असंतोष भी सामने आने लगा है। कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए काम किया है और कई बार पार्टी के आंदोलनों में हिस्सा लेते हुए मुकदमों तथा जेल जाने जैसी परिस्थितियों का सामना किया है। ऐसे में किसी एक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने के आधार पर उनके खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई करना उचित नहीं है। वहीं, संगठन का पक्ष है कि महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रमों में पदाधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना संगठनात्मक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

आठ राज्यों की इकाइयों में 215 पदाधिकारियों पर कार्रवाई

उपलब्ध निलंबन आदेशों के अनुसार, यूथ कांग्रेस ने अलग-अलग राज्यों में कुल 215 पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। इनमें मध्य प्रदेश के सबसे अधिक पदाधिकारी शामिल हैं। राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य प्रदेश में 60, गुजरात में 49, झारखंड में 32 और पश्चिम बंगाल में 26 पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।

इसके अलावा तेलंगाना में 14, हिमाचल प्रदेश में 13, उत्तर प्रदेश मध्य इकाई में 11 और हरियाणा में 10 पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है।

डिजिटल माध्यम से रखी गई थी रैली में उपस्थिति पर नजर

दिल्ली में आयोजित रैली में पदाधिकारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए यूथ कांग्रेस ने डिजिटल व्यवस्था भी की थी। इसके लिए संगठन के आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन ‘With IYC’ का इस्तेमाल किया गया। पदाधिकारियों को कार्यक्रम में पहुंचने और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए एप पर रजिस्ट्रेशन करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके अलावा दिल्ली के मिंटो रोड स्थित सभा स्थल पर बारकोड स्कैनर लगाए गए थे। इनके माध्यम से रैली में शामिल होने वाले पदाधिकारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा था। संगठन ने इस व्यवस्था के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की कि किन पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कौन अनुपस्थित रहा।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यूथ कांग्रेस ने मिंटो रोड पर लगभग 15 हजार लोगों के एकत्र होने की जानकारी दी थी, जबकि मोबाइल एप पर केवल 2,831 लोगों का रजिस्ट्रेशन दर्ज हुआ। रिपोर्ट में तकनीकी जानकारी की कमी, रजिस्ट्रेशन में रुचि का अभाव और धीमे इंटरनेट को भी कम डिजिटल उपस्थिति दर्ज होने के संभावित कारणों में बताया गया।

रैली के बाद संगठन ने डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारियों की समीक्षा की। इसके आधार पर अनुपस्थित पदाधिकारियों की सूची तैयार की गई और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हुई

यूथ कांग्रेस नेतृत्व ने अनुशासन को बताया जरूरी

दूसरी तरफ यूथ कांग्रेस का नेतृत्व इस कार्रवाई को संगठनात्मक अनुशासन से जोड़कर देख रहा है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि रैली में 15 हजार से अधिक युवा कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्र हुए थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों को कार्यक्रम में शामिल होने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।

उनके मुताबिक, संगठन में जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे नेतृत्व के निर्देशों का पालन करें और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में अपनी भूमिका निभाएं। संगठन ने अनुपस्थित रहने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई इसी जवाबदेही के तहत की है।

गुजरात यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष प्रवीणसिंह वानोल ने भी कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। निलंबित पदाधिकारियों से अनुपस्थिति का कारण पूछने के लिए प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी और संतोषजनक स्पष्टीकरण के आधार पर पदाधिकारियों की वापसी पर विचार किया जा सकता है।

500 तक पहुंच सकती है निलंबित पदाधिकारियों की संख्या

इस कार्रवाई के बाद यूथ कांग्रेस में अनुशासनात्मक समीक्षा का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्टों में पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आने वाले समय में अनुपस्थित रहने वाले अन्य पदाधिकारियों की भी समीक्षा की जा सकती है। यदि संगठन को और पदाधिकारियों की अनुपस्थिति की जानकारी मिलती है, तो कार्रवाई का आंकड़ा 500 तक पहुंचने की आशंका है। हालांकि, 500 का आंकड़ा अभी संभावित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल 215 पदाधिकारियों का निलंबन संगठन के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ नेतृत्व महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उपस्थिति और संगठनात्मक निर्देशों के पालन को जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ निलंबित पदाधिकारी व्यक्तिगत परिस्थितियों और लंबे संगठनात्मक योगदान को ध्यान में रखने की मांग कर रहे हैं।

आने वाले दिनों में निलंबित पदाधिकारियों के स्पष्टीकरण और संगठन की समीक्षा के बाद यह तय होगा कि कितने लोगों का निलंबन वापस लिया जाता है और कितनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के युवा संगठन में अनुशासन, जवाबदेही और पदाधिकारियों को अपनी बात रखने का अवसर देने जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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