देशभर में आज धनतेरस का त्योहार पारंपरिक उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन बाजारों में सोने-चांदी के आभूषणों, बर्तनों, दीपकों और घर की सजावट से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक होती हैं।
इस बार धनतेरस पर विशेष ज्योतिषीय संयोग बनने की बात कही जा रही है। यह पर्व शुक्र प्रदोष के संयोग में आया है। साथ ही शुक्र ग्रह के अपनी स्वराशि तुला में होने को भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं और खरीदारी करने वाले लोगों के बीच शुभ मुहूर्त को लेकर खास उत्साह है।
धनतेरस पर खरीदारी के लिए आज दूसरा शुभ समय अभिजीत मुहूर्त है, जो सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। वहीं, तीसरा शुभ समय शाम के प्रदोष काल में निर्धारित है। यह समय शाम 5 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस दौरान लोग अपनी सुविधा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं।
धनतेरस पर खरीदारी के लिए तीन शुभ समय का महत्व
धनतेरस के अवसर पर खरीदारी के लिए अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। धार्मिक परंपराओं में मुहूर्त का विशेष महत्व है। मान्यता है कि शुभ समय में नई वस्तुएं खरीदने और पूजा-पाठ करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
इस बार अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक रहेगा। इसे दिन के महत्वपूर्ण शुभ समयों में गिना जाता है। जो लोग सुबह से खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह समय विशेष माना जा रहा है।
इसके बाद शाम का प्रदोष काल खरीदारी और पूजा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक बताया गया है। इस दौरान लोग सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन, दीपक और पूजा सामग्री खरीद सकते हैं।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है। इसलिए कई परिवार प्रदोष काल में खरीदारी के साथ पूजा-अर्चना की तैयारी करते हैं। हालांकि, पूजा और खरीदारी के मुहूर्त अलग-अलग हो सकते हैं। पूजा का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग और अपने क्षेत्र के अनुसार निर्धारित समय देखना उचित रहेगा।
शुक्र प्रदोष और तुला राशि में शुक्र का विशेष संयोग
इस बार धनतेरस पर शुक्र प्रदोष का संयोग होने की बात कही जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र ग्रह को सुख, सौंदर्य, ऐश्वर्य, भौतिक सुविधाओं और वैभव से जोड़कर देखा जाता है। शुक्र की स्वराशि तुला में स्थिति को भी शुभ संकेत के रूप में माना जाता है।
धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में ऐसे संयोगों को खरीदारी, पूजा और मांगलिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से धनतेरस जैसे पर्व पर जब लोग घर में नई वस्तुएं लाते हैं, तब शुभ ग्रह स्थिति को लेकर उनकी रुचि बढ़ जाती है।
हालांकि, ज्योतिषीय संयोग धार्मिक आस्था और परंपराओं का विषय हैं। इनका महत्व व्यक्ति की मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना क्यों माना जाता है शुभ?
धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। भारतीय परिवारों में इन धातुओं को धन, वैभव और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन सराफा बाजारों में विशेष रौनक रहती है।
कई लोग धनतेरस पर सोने या चांदी के सिक्के खरीदते हैं, जबकि कुछ परिवार अंगूठी, चेन, कंगन और दूसरे आभूषण खरीदना पसंद करते हैं। कुछ लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार छोटी मात्रा में सोना-चांदी खरीदकर भी इस परंपरा का पालन करते हैं।
धनतेरस पर खरीदारी का उद्देश्य केवल महंगे आभूषण लेना नहीं होता, बल्कि शुभ अवसर पर घर में कोई नई वस्तु लाने की परंपरा निभाना भी होता है। इसी वजह से बाजार में अलग-अलग बजट के विकल्प उपलब्ध रहते हैं।
ग्राहकों को सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता, हॉलमार्क और छह अंकों वाले HUID की जांच करनी चाहिए। चांदी खरीदते समय भी शुद्धता और वजन की पुष्टि करना जरूरी है। इसके अलावा बिल में कीमत, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क का विवरण जरूर देखना चाहिए।
मिट्टी के दीये और पीतल के दीपक खरीदने का महत्व
धनतेरस और दीपावली पर दीप जलाने की परंपरा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। दीपक को प्रकाश, सकारात्मकता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण धनतेरस के दिन लोग घर के लिए नए दीपक खरीदते हैं।
बाजारों में इस अवसर पर मिट्टी के दीये, पीतल के दीपक और सजावटी लैंप की अच्छी मांग रहती है। मिट्टी के दीये पारंपरिक दीपावली उत्सव की पहचान हैं। वहीं, पीतल के दीपक लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं और पूजा घर की सजावट में भी उपयोगी होते हैं।
कई परिवार धनतेरस के दिन ही दीपावली की सजावट के लिए जरूरी सामान खरीद लेते हैं। घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, आंगन और बालकनी में दीपक जलाने की तैयारी भी इसी दिन से शुरू हो जाती है।
झाड़ू खरीदने की भी है पुरानी धार्मिक परंपरा
धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी कई क्षेत्रों में शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को माता लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। इसे घर की गंदगी और अव्यवस्था दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता के अनुसार, साफ-सुथरे घर में माता लक्ष्मी का वास होता है। इसी विश्वास के चलते कई परिवार धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदते हैं और घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं।
हालांकि, यह एक पारंपरिक धार्मिक मान्यता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इस परंपरा को निभाने के तरीके अलग हो सकते हैं। बाजारों में भी धनतेरस के अवसर पर झाड़ू की खरीदारी बढ़ जाती है।
धनतेरस पर बाजारों में खरीदारी की बढ़ी हलचल
धनतेरस के अवसर पर देशभर के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है। सराफा दुकानों से लेकर बर्तन, सजावट और पूजा सामग्री की दुकानों तक खरीदारी का माहौल रहता है। सोने-चांदी के अलावा लोग तांबे, पीतल और स्टील के बर्तन भी खरीदते हैं।
त्योहारी खरीदारी के दौरान ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार वस्तुओं का चयन करते हैं। कुछ लोग परंपरा के अनुसार सोना-चांदी खरीदते हैं, तो कुछ परिवार दीपक, बर्तन, झाड़ू और पूजा सामग्री को प्राथमिकता देते हैं।
खरीदारी और पूजा के लिए शुभ समय का रखें ध्यान
धनतेरस पर इस बार अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक और प्रदोष काल शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक बताया गया है। इन समयों में श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार खरीदारी और धार्मिक गतिविधियां कर सकते हैं।
कुल मिलाकर धनतेरस केवल खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की आराधना के साथ सुख-समृद्धि की कामना करने का अवसर भी है। सोना-चांदी, दीपक, बर्तन, झाड़ू और साबुत धनिया जैसी वस्तुओं से जुड़ी परंपराएं इस त्योहार को विशेष बनाती हैं। दीपावली से पहले मनाया जाने वाला यह पर्व परिवारों में उत्साह, नई उम्मीद और खुशियों का संदेश लेकर आता है।




