नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी बॉश लिमिटेड (Bosch Limited) ने बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने अपने शेयरधारकों को एक साथ दो बड़े कॉरपोरेट तोहफे देने का फैसला किया है। इसके तहत कंपनी 1:5 के अनुपात में स्टॉक स्प्लिट और 3:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करेगी। इन दोनों प्रस्तावों के लागू होने के बाद कंपनी का एक मौजूदा शेयर कुल 20 शेयरों में बदल जाएगा। कंपनी के इस फैसले से खासतौर पर उन निवेशकों का ध्यान आकर्षित हुआ है, जो बॉश के शेयर में निवेश रखते हैं या भविष्य में इसमें निवेश करने की योजना बना रहे हैं।

बॉश के निदेशक मंडल ने 6 नवंबर 2026 को हुई बैठक में इन दोनों प्रस्तावों को मंजूरी दी। हालांकि, स्टॉक स्प्लिट और बोनस शेयर जारी करने की प्रक्रिया शेयरधारकों की आवश्यक मंजूरी के अधीन है। कंपनी ने इसके लिए पोस्टल बैलेट की प्रक्रिया अपनाने की जानकारी भी दी है। MarketScreener+1
1. कैसे एक शेयर के बनेंगे 20 शेयर?
बॉश ने स्टॉक स्प्लिट के लिए 1:5 का अनुपात तय किया है। इसका मतलब है कि कंपनी का प्रत्येक मौजूदा शेयर, जिसकी फेस वैल्यू 10 रुपये है, विभाजित होकर 2 रुपये फेस वैल्यू वाले पांच शेयरों में बदल जाएगा।
इसके बाद कंपनी 3:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करेगी। यानी स्टॉक स्प्लिट के बाद निवेशक के पास मौजूद प्रत्येक एक शेयर पर तीन अतिरिक्त बोनस शेयर दिए जाएंगे।
इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए किसी निवेशक के पास बॉश का एक शेयर है। स्टॉक स्प्लिट के बाद उसके पास पांच शेयर हो जाएंगे। इसके बाद 3:1 बोनस के तहत उसे 15 अतिरिक्त शेयर मिलेंगे। इस तरह उसके पास कुल 20 शेयर हो जाएंगे।
2. क्या है स्टॉक स्प्लिट और इससे निवेशकों को क्या फायदा होगा?
स्टॉक स्प्लिट किसी कंपनी द्वारा अपने मौजूदा शेयरों को छोटे फेस वैल्यू वाले अधिक शेयरों में बांटने की प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य शेयर की प्रति इकाई कीमत को कम करना और निवेशकों के लिए शेयरों को अधिक सुलभ बनाना होता है।
बॉश के मामले में 10 रुपये फेस वैल्यू वाला एक शेयर पांच हिस्सों में बंटकर 2 रुपये फेस वैल्यू वाले पांच शेयर बन जाएगा।
इसका एक संभावित फायदा यह है कि शेयर की कीमत कम होने से छोटे निवेशकों के लिए कंपनी के शेयर खरीदना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इसके अलावा बाजार में शेयरों की संख्या बढ़ने से कारोबार की उपलब्धता और लिक्विडिटी में भी सुधार की संभावना रहती है।
हालांकि, निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि केवल स्टॉक स्प्लिट होने से उनके निवेश की कुल वैल्यू अपने आप नहीं बढ़ती। स्प्लिट के अनुपात में शेयर की कीमत भी समायोजित होती है।
3. बोनस शेयर से निवेशकों की होल्डिंग में होगा इजाफा
स्टॉक स्प्लिट के साथ बोनस शेयर का ऐलान इस कॉरपोरेट कार्रवाई को और महत्वपूर्ण बनाता है। बोनस शेयर कंपनी की ओर से मौजूदा पात्र शेयरधारकों को बिना अतिरिक्त भुगतान के दिए जाने वाले अतिरिक्त इक्विटी शेयर होते हैं।
बॉश ने 3:1 बोनस अनुपात निर्धारित किया है। इसका अर्थ है कि स्प्लिट के बाद निवेशक के पास मौजूद प्रत्येक एक शेयर पर तीन बोनस शेयर मिलेंगे।
बोनस शेयर कंपनी के संचित मुनाफे से जारी किए जाएंगे। इससे निवेशकों के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाएगी, लेकिन कंपनी की कुल संपत्ति या निवेशक की होल्डिंग का बाजार मूल्य केवल बोनस मिलने से अपने आप नहीं बढ़ता। बोनस के बाद शेयर की बाजार कीमत भी उसी अनुपात में समायोजित होती है।
इसलिए निवेशकों को केवल शेयरों की संख्या बढ़ने को सीधे मुनाफे के रूप में नहीं देखना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी बात?
बॉश का 1:5 स्टॉक स्प्लिट और 3:1 बोनस शेयर का फैसला कंपनी की बड़ी कॉरपोरेट घोषणाओं में शामिल है। इससे मौजूदा शेयरधारकों की शेयर संख्या पांच गुना होने के बाद बोनस के कारण चार गुना और बढ़ जाएगी। यानी एक पुराने शेयर के बदले कुल 20 शेयर मिलेंगे।
हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि शेयरों की संख्या बढ़ना और निवेश की वैल्यू बढ़ना दो अलग-अलग बातें हैं। स्टॉक स्प्लिट और बोनस के बाद शेयर की कीमत में भी उसी अनुपात में समायोजन होता है।
इसलिए किसी भी निवेश का फैसला केवल बोनस या स्टॉक स्प्लिट की घोषणा देखकर नहीं करना चाहिए। कंपनी की वित्तीय स्थिति, मुनाफे की वृद्धि, कारोबार की संभावनाओं और शेयर के मौजूदा मूल्यांकन को भी ध्यान में रखना जरूरी है। बॉश के ताजा नतीजे और आगामी कॉरपोरेट कार्रवाई अब बाजार में निवेशकों के लिए चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।




