देश की राजनीति में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवधि में देश के लोकतांत्रिक ढांचे, संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचा है। सोनिया गांधी के इन बयानों के बाद भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने उन्हें भारत की आर्थिक और विकास संबंधी उपलब्धियों को देखने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें अपना ‘इटावली चश्मा’ उतारकर देश की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।
इस राजनीतिक विवाद में सोनिया गांधी की आने वाली आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ भी चर्चा का विषय बन गई है। भाजपा नेताओं ने किताब में कांग्रेस के पुराने कार्यकाल, आपातकाल और विभिन्न विवादों से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में लोकतंत्र, आर्थिक विकास, राजनीतिक जवाबदेही और ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
सोनिया गांधी ने मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर क्या कहा?
सोनिया गांधी ने अपनी आगामी आत्मकथा के प्रकाशन से पहले अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में केंद्र सरकार के कामकाज पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को काफी नुकसान पहुंचा है।
उनका कहना था कि मौजूदा सरकार के जाने के बाद भी देश की संस्थाओं और व्यवस्थाओं को फिर से मजबूत स्थिति में लाने के लिए काफी समय और राजनीतिक दलों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता होगी।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का संवैधानिक संस्थाओं पर अत्यधिक प्रभाव है। उन्होंने विशेष रूप से निर्वाचन आयोग और मुख्यधारा के मीडिया का उल्लेख किया। उनके अनुसार, विपक्षी दलों को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए समान अवसर नहीं मिल रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी राजनीति में आर्थिक संसाधनों और धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
भाजपा सांसद तरुण चुघ का ‘इटावली चश्मा’ वाला बयान
सोनिया गांधी के आरोपों पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस नेता के बयान पर पलटवार करते हुए उन्हें ‘इटावली चश्मा’ उतारकर भारत की प्रगति देखने की सलाह दी।
तरुण चुघ ने कहा कि यदि सोनिया गांधी अपना इटावली चश्मा उतार देंगी तो उन्हें देश में हो रहा विकास स्पष्ट दिखाई देगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही सरकार के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ का उल्लेख किया।
चुघ ने भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए 7.8 प्रतिशत की जीडीपी विकास दर का हवाला दिया और कहा कि देश वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
भाजपा सांसद ने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान और आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है। उन्होंने सोनिया गांधी के आरोपों को राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें देश में हो रहे बदलावों और विकास को भी स्वीकार करना चाहिए।
आत्मकथा को लेकर भी भाजपा ने उठाए सवाल
सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ भी इस विवाद का प्रमुख हिस्सा बन गई है। यह पुस्तक 10 नवंबर 2026 को हार्पर कॉलिन्स इंडिया की ओर से प्रकाशित होने वाली है। 544 पन्नों की इस किताब में सोनिया गांधी ने अपने निजी जीवन, परिवार, भारत से जुड़ाव और राजनीतिक यात्रा के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया है।
पुस्तक को लेकर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने सोनिया गांधी की आत्मकथा की आलोचना करते हुए इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि किताब में व्यक्तिगत अनुभवों की तुलना में राजनीतिक आरोपों और विरोधियों को निशाना बनाने वाली बातों पर अधिक जोर दिखाई देता है।
नकवी ने कहा कि सोनिया गांधी लंबे समय तक कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की अध्यक्ष के रूप में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में उनकी आत्मकथा से राजनीतिक जीवन के अनुभवों और ऐतिहासिक घटनाओं पर विस्तृत जानकारी की अपेक्षा की जाती है।
आपातकाल पर सोनिया गांधी की टिप्पणी से भी विवाद
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है।
सोनिया गांधी ने अपने साक्षात्कार में आपातकाल के दौर पर भी विचार रखे। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौरान नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार सीमित किए गए थे और बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) के अधिकार का निलंबन हुआ था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह सब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ था।
उन्होंने उस समय की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं तथा व्यापक अव्यवस्था जैसी स्थितियां थीं। उनके अनुसार, इंदिरा गांधी के सामने उस समय कई तरह की चुनौतियां थीं।
सोनिया गांधी ने इस पुस्तक को केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि उस यात्रा के रूप में भी बताया है, जिसके दौरान उनका जुड़ाव राजीव गांधी के परिवार और भारत से गहरा होता गया। उन्होंने यह भी बताया कि परिवार और देश के प्रति उनका लगाव किस तरह उन्हें सार्वजनिक जीवन और राजनीति की ओर लेकर आया।
किताब के प्रकाशन से पहले दिए गए उनके साक्षात्कार ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि पुस्तक में शामिल व्यक्तिगत अनुभवों और राजनीतिक घटनाओं को लेकर आगे किस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।
फिलहाल सोनिया गांधी के आरोपों और भाजपा के पलटवार ने केंद्र सरकार, कांग्रेस और विपक्ष के बीच राजनीतिक विमर्श को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में आत्मकथा के प्रकाशन के बाद इस विवाद से जुड़े कई अन्य पहलुओं पर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।





