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1. मुंबई (BMC) का शक्ति संतुलन
बीएमसी की 227 सीटों का गणित अब पूरी तरह से एकनाथ शिंदे के हाथ में है:
- बहुमत का आंकड़ा: 114
- भाजपा की ताकत: 89 सीटें (बहुमत से 25 कम)
- शिवसेना (शिंदे) की ताकत: 29 सीटें
- समीकरण: यदि शिंदे गुट भाजपा को समर्थन देता है, तो यह आंकड़ा 118 (89 + 29) हो जाता है, जो बहुमत से अधिक है।
राजनीतिक महत्व: शिंदे गुट का अपने पार्षदों को ताज होटल में शिफ्ट करना यह दिखाता है कि वे अपनी ‘बार्गेनिंग पावर’ (मोलभाव करने की शक्ति) को सुरक्षित रखना चाहते हैं और विपक्षी खेमे (UBT) द्वारा किसी भी तरह की सेंधमारी को रोकना चाहते हैं।
2. महायुति के भीतर ‘शीत युद्ध’?
भले ही फडणवीस कह रहे हों कि कोई विवाद नहीं है, लेकिन जमीनी संकेत कुछ और ही कह रहे हैं:
- नाराजगी की वजह: भाजपा ने अकेले दम पर 17 निगम जीते हैं, जबकि शिंदे और अजित पवार गुट का प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा। इससे गठबंधन में भाजपा का वर्चस्व बढ़ गया है।
- कैबिनेट से दूरी: दोनों उपमुख्यमंत्रियों का कैबिनेट बैठक में न जाना महज ‘बीमारी’ नहीं, बल्कि एक कड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
3. विपक्ष का ‘मराठी कार्ड’
उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और संजय राउत के बयानों से स्पष्ट है कि वे इस हार को ‘मराठी अस्मिता’ बनाम भाजपा की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं। संजय राउत का शिंदे को ‘जयचंद’ कहना यह दर्शाता है कि आने वाले समय में शिवसेना (UBT) इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच आक्रामक रहेगी।
नगर निगम चुनाव परिणाम (Snapshot)
कुल नगर निगम: 29
| विजेता दल/गठबंधन | सीटों की संख्या |
| भाजपा (स्वयं के दम पर) | 17 |
| महायुति (शिंदे + अजित पवार + भाजपा) | 08 |
| कुल भाजपा समर्थित | 25 |




