नई दिल्ली (drnewsindia.com): भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों के लिए एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस सप्ताह एक के बाद एक तीन सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) दस्तक देने जा रहे हैं। इस ‘ट्रिपल अटैक’ के कारण न केवल आम जनजीवन बल्कि कृषि क्षेत्र में भी भारी अस्थिरता रहने की संभावना है।
इन राज्यों में दिखेगा असर और बदलाव का कारण
IMD की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार सक्रिय हो रहे इन विक्षोभों के कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक और छिटपुट बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक साथ तीन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का सक्रिय होना एक विशेष स्थिति है, जिससे हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनेगा और पूरे उत्तर भारत सहित मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदलेगा।
फसलों पर संकट: किसानों के लिए बड़ी चेतावनी
इस समय गेहूं, सरसों और चने की फसलें या तो पक कर तैयार हैं या कटाई के बिल्कुल करीब हैं। ऐसे में मौसम का यह बदलाव खेती-किसानी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है:
- तेज हवाओं का खतरा: तेज हवाएं खड़ी फसलों को गिरा सकती हैं, जिससे पैदावार में भारी कमी आ सकती है।
- ओलावृष्टि और नमी: बारिश और ओलावृष्टि से कटी हुई फसलों में नमी बढ़ सकती है, जिससे दानों की चमक और गुणवत्ता खराब होने का डर है।
कृषि विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह (Farmers Advisory)
बेमौसम बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए कृषि विभाग और विशेषज्ञों ने किसानों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है:
- सिंचाई तुरंत रोकें: बारिश की संभावना को देखते हुए अभी खेतों में पानी न लगाएं। गीली मिट्टी होने पर तेज हवा से फसलें जल्दी गिर जाती हैं।
- कटाई और भंडारण: यदि फसल पक चुकी है, तो मौसम साफ होने का इंतजार करें। कटी हुई फसल को खेत में खुला न छोड़ें, उसे ऊंचे स्थानों पर तिरपाल से ढककर रखें।
- दवाओं का छिड़काव न करें: बारिश और नमी के दौरान किसी भी प्रकार के कीटनाशक का प्रयोग न करें, अन्यथा दवा धूल जाएगी और श्रम व पैसा दोनों बर्बाद होंगे।
- मंडी ले जाते समय सावधानी: अनाज को मंडी ले जाते समय साथ में प्लास्टिक शीट या तिरपाल जरूर रखें ताकि रास्ते में अचानक बारिश होने पर फसल को बचाया जा सके।




