Drnewsindia / दिनांक: 4 जनवरी, 2026
भोपाल: राजधानी के प्रतिष्ठित जिला चिकित्सालय (जेपी अस्पताल) से स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल की फार्मेसी से एक मरीज को ऐसी दवा थमा दी गई जिस पर फफूंद (Fungus) लगी हुई थी। राहत की बात यह रही कि मरीज ने समय रहते इसे देख लिया, वरना कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
घटना का विवरण: दर्द की दवा में मिली ‘फफूंद’
पीड़ित मरीज सतीष सेन शुक्रवार शाम करीब 5 बजे पैर में फ्रैक्चर की शिकायत लेकर जेपी अस्पताल पहुंचे थे।
- इंटर्न के भरोसे ओपीडी: मरीज का आरोप है कि ओपीडी में कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था, वहां मौजूद इंटर्न डॉक्टरों ने ही परीक्षण कर एक्स-रे और दर्द निवारक दवा लिख दी।
- फार्मेसी की लापरवाही: जब मरीज ने अस्पताल की फार्मेसी से दवा ली, तो वहां तैनात स्टाफ ने भी दवा की गुणवत्ता जांचने की जरूरत नहीं समझी।
हैरान करने वाले तथ्य: 2027 तक थी एक्सपायरी
मरीज को दी गई दवा ‘डिक्लोफेनाक 50 एमजी’ (Batch No: DSM 25002) को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
- एक्सपायरी डेट: जून 2027 (यानी दवा अभी डेढ़ साल तक वैध थी)।
- हालिया सप्लाई: यह दवा महज दो महीने पहले, 27 अक्टूबर 2025 को ही मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवा निगम (MPPHSCL) द्वारा सप्लाई की गई थी।
- स्थिति: घर जाकर जब मरीज ने स्ट्रिप खोली, तो टैबलेट्स पर फंगस जमा हुआ था।
⚠️ सिस्टम पर खड़े हुए 3 बड़े सवाल
- सीनियर डॉक्टर्स कहाँ हैं? शाम की ओपीडी क्या सिर्फ इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे चल रही है?
- कैसा है स्टोरेज? अगर दवा 2027 तक वैध है, तो क्या अस्पताल के स्टोर में नमी या खराब रख-रखाव के कारण इसमें फफूंद लगी?
- जांच में चूक क्यों? फार्मेसी से दवा वितरण के समय उसकी फिजिकल कंडीशन की जांच क्यों नहीं की गई?
CMHO तक पहुंची शिकायत
मरीज सतीष सेन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को ई-मेल के जरिए लिखित शिकायत भेजी है। मरीज का कहना है कि यदि कोई अनपढ़ या गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति यह दवा खा लेता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
नोट: यह मामला स्वास्थ्य विभाग की सप्लाई चेन और अस्पताल के भीतर दवाओं के रख-रखाव की पोल खोलता है।




