drnewsindiaभोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर घमासान छिड़ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पद से हटाने की मांग की है। विपक्ष ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘पूरी तरह विफल’ करार दिया है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा: “बिना पैसे कोई काम नहीं”
कांग्रेस ने राज्य के प्रशासनिक सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार को इस पत्र का मुख्य आधार बनाया है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बड़ा दावा करते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने लिखा:
“मुख्य सचिव स्वयं कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री जी का कहना है कि बिना पैसे लिए कोई कलेक्टर नहीं बनता। जब जिले चलाने वाले जिम्मेदार अफसर ही लेन-देन की स्वार्थी प्रक्रिया में जकड़े हों, तो आम जनता को न्याय और पारदर्शिता कैसे मिलेगी?”
जीतू पटवारी के पत्र की 3 बड़ी बातें:
- नैतिक जिम्मेदारी: पटवारी ने कहा कि सीएम मोहन यादव को प्रशासनिक विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
- प्रशासनिक पतन: पत्र में आरोप लगाया गया है कि राज्य का सिस्टम भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुका है और सरकार का नियंत्रण अफसरों पर से खत्म हो गया है।
- सुशासन का अभाव: कांग्रेस का दावा है कि राज्य में ‘सुशासन’ सिर्फ कागजों पर है, जबकि धरातल पर आम जनता परेशान है।
सियासी गलियारों में चर्चा: क्या है इसके मायने?
मध्य प्रदेश में इस समय विपक्षी दल काफी आक्रामक नजर आ रहा है। मुख्य सचिव के कथित बयानों को ढाल बनाकर कांग्रेस ने सीधे दिल्ली (PMO) तक अपनी बात पहुँचाई है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा सड़क से लेकर सदन तक गरमाएगा।
| पक्ष | मुख्य आरोप/बयान |
| जीतू पटवारी (PCC Chief) | प्रशासनिक विफलता के कारण CM का इस्तीफा जरूरी। |
| उमंग सिंघार (LoP) | अफसरों की पोस्टिंग में ‘लेन-देन’ का खेल चल रहा है। |
| कांग्रेस की मांग | PM मोदी मध्य प्रदेश के प्रशासनिक सिस्टम में हस्तक्षेप करें। |




