Drnewsindia/भोपाल। मध्यप्रदेश में सत्ता के वनवास को खत्म करने के लिए कांग्रेस अब ‘मिशन मोड’ में आ गई है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस अब केवल शहरों तक सीमित न रहकर सीधे गांवों की चौपाल तक पहुँचने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत 20 फरवरी तक प्रदेश की सभी 23,000 ग्राम पंचायतों में कमेटियां गठित करने का महा-लक्ष्य रखा है।
6 लाख कार्यकर्ताओं की ‘फौज’ तैयार करेगी कांग्रेस
कांग्रेस का लक्ष्य केवल नाम की कमेटी बनाना नहीं, बल्कि एक सक्रिय जमीनी ढांचा खड़ा करना है। पार्टी की रणनीति इस प्रकार है:
- सदस्य संख्या: हर ग्राम पंचायत कमेटी में कम से कम 25 सदस्य होंगे।
- समावेशी ढांचा: कमेटी में महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवा दल, आईटी सेल और एससी-एसटी/अल्पसंख्यक सेल के प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल होंगे।
- कुल लक्ष्य: इस अभियान के जरिए कांग्रेस प्रदेश भर में 6 लाख से अधिक सक्रिय कार्यकर्ताओं को सीधे संगठन से जोड़ने जा रही है।
कांग्रेस के सामने ‘चुनौतियों का पहाड़’
भले ही लक्ष्य बड़ा हो, लेकिन डगर आसान नहीं है। कांग्रेस के सामने तीन मुख्य बाधाएं हैं:
- समय की कमी: 23 हजार पंचायतों के लिए मात्र 45 दिन का समय जिला और ब्लॉक अध्यक्षों के लिए बड़ी चुनौती है।
- बीजेपी का गढ़: कई विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का इतना प्रभाव है कि वहां कांग्रेस का झंडा उठाने वाले कार्यकर्ता जुटाना मुश्किल हो रहा है।
- देरी से चलती टीम: जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के 4 महीने बाद भी कई जिलों में अब तक कार्यकारिणी घोषित नहीं हो पाई है।
“हमारा पूरा फोकस संगठन को निचले स्तर तक मजबूत करने पर है। नए साल में मंडलम, सेक्टर और ग्राम पंचायत कमेटियों का गठन होते ही हम पूरी ताकत से आगामी चुनाव की तैयारी में जुट जाएंगे।”
— मुकेश नायक, अध्यक्ष, मप्र कांग्रेस मीडिया विभाग
बीजेपी बनाम कांग्रेस: संगठन की स्थिति
| विवरण | कांग्रेस (संगठन सृजन) | भाजपा (कार्यकारिणी विस्तार) |
| मुख्य लक्ष्य | 23,000 ग्राम पंचायत कमेटियां बनाना | 62 जिला कार्यकारिणी का पूर्ण गठन |
| समय सीमा | 20 फरवरी तक का टारगेट | अगस्त से प्रक्रिया जारी |
| मौजूदा स्थिति | अभियान जारी, ‘केडिया देव’ से शुरुआत | 62 में से 50 जिलों की लिस्ट जारी |
| रणनीति | पंचायत स्तर पर 6 लाख नए चेहरे | ऑब्जर्वर की रिपोर्ट पर चयन |
बीजेपी में भी ‘वेटिंग’ का दौर
दिलचस्प बात यह है कि केवल कांग्रेस ही नहीं, सत्ताधारी भाजपा भी संगठन विस्तार में कछुआ चाल चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर्स ने अगस्त में ही रिपोर्ट दे दी थी, लेकिन 6 महीने बाद भी 62 में से केवल 50 जिलों की कार्यकारिणी ही घोषित हो पाई है। 12 जिलों में अब भी नियुक्तियों का इंतजार है।




