गौरव चौहान, भोपाल/ Drnewsindia
मध्यप्रदेश की सियासत में इन दिनों एक नई हलचल शुरू हो गई है। अगले साल जून में प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की है। 12 साल से राज्यसभा सांसद रहे दिग्विजय सिंह का दूसरा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस उन्हें तीसरी बार मौका देगी या उनकी जगह कोई नया चेहरा सदन पहुंचेगा?
भाजपा संगठन की तारीफ: सोची-समझी चाल या महज संयोग?
राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले दिग्विजय सिंह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली की तारीफ की। राजनीतिक जानकार इसे दिग्विजय की एक ‘पॉलिटिकल गुगली’ मान रहे हैं।
- दबाव की राजनीति: कांग्रेस हाईकमान को यह संकेत देना कि वे अभी भी राजनीति में अपरिहार्य हैं।
- अस्तित्व की लड़ाई: यह जताना कि वे विपक्षी खेमे की ताकत को समझते हैं और उनसे लड़ने का अनुभव केवल उनके पास है।
- संगठन में जगह: यदि राज्यसभा नहीं, तो पार्टी में किसी बड़ी भूमिका के लिए जमीन तैयार करना।
राज्यसभा के लिए कांग्रेस में दावेदारों की कतार
दिग्विजय सिंह के अलावा इस बार कई अन्य दिग्गज भी रेस में माने जा रहे हैं:
| दावेदार | राजनीतिक स्थिति | प्रमुख कारण |
| दिग्विजय सिंह | निवर्तमान सांसद | 54 साल का अनुभव, 78 की उम्र में भी बेहद सक्रिय। |
| जीतू पटवारी | प्रदेश अध्यक्ष | युवा नेतृत्व को मौका देने की पार्टी की नई नीति। |
| कमलनाथ/नकुलनाथ | पूर्व मुख्यमंत्री | पहली बार परिवार का कोई सदस्य सदन (लोकसभा/विधानसभा) में नहीं है। |
‘रिटायरमेंट’ दिग्विजय के शब्दकोश में नहीं
78 साल की उम्र में भी दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश कांग्रेस के सबसे सक्रिय नेताओं में से एक हैं। जहाँ एक ओर कांग्रेस अब लगातार दो बार से ज्यादा राज्यसभा भेजने में परहेज कर रही है, वहीं दिग्विजय सिंह ने सीडब्ल्यूसी की बैठक से पहले यह कहकर सस्पेंस बढ़ा दिया कि “हम लोगों का तो हो गया, लेकिन नए लोगों का क्या होगा इसकी चिंता है।” विशेषज्ञों का मानना है कि:
दिग्विजय सिंह घर बैठने वाले नेताओं में से नहीं हैं। यदि पार्टी उन्हें राज्यसभा नहीं भेजती है, तो वे संगठन में किसी बड़ी भूमिका या राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कोई नया दांव चल सकते हैं।




