drnewsindia.com / वॉशिंगटन (अमेरिका)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने मंगल ग्रह (Mars) का अध्ययन कर रहे अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष यान ‘मेवेन’ (MAVEN – Mars Atmosphere and Volatile EvolutioN) को आधिकारिक तौर पर मृत (Dead) घोषित कर दिया है। पिछले छह महीनों से इस स्पेसक्राफ्ट से किसी भी तरह का रेडियो संपर्क नहीं हो पा रहा था, जिसके बाद नासा ने पुष्टि की है कि एक दशक से अधिक समय तक लाल ग्रह की निगरानी करने के बाद अब यह मिशन हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।
साल 2013 में लॉन्च किया गया यह स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह के वायुमंडल और पर्यावरण को समझने में विज्ञान की दुनिया के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ था।
🛰️ रहस्यमयी तरीके से क्यों टूट गया संपर्क?
नासा के अनुसार, मेवेन स्पेसक्राफ्ट पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में मंगल ग्रह के पीछे से गुजरने के दौरान रहस्यमयी तरीके से मौन हो गया था। इसके बाद से उससे कोई सिग्नल नहीं मिला।
- अनियंत्रित स्पिन (Fast Spin): शुरुआती आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अंतरिक्ष यान अचानक बहुत तेजी से घूमने लगा (फास्ट स्पिन) था।
- बैटरी हुई डेड: इस अनियंत्रित स्पिन के कारण मेवेन अपनी निर्धारित कक्षा (Orbit) से भटक गया, जिससे उसके सोलर पैनल सूरज की रोशनी नहीं ले पाए और उसकी ऑनबोर्ड बैटरियां पूरी तरह ड्रेन (खत्म) हो गईं।
नासा द्वारा इस साल की शुरुआत में गठित किए गए एक विशेष समीक्षा बोर्ड (Review Board) ने जांच के बाद निष्कर्ष निकाला है कि यह यान अब पूरी तरह से बेकार हो चुका है और इसे दोबारा ठीक या रिकवर करना नामुमकिन है।

⏳ अगले 50 से 100 सालों तक अंतरिक्ष में भटकता रहेगा ‘मेवेन’
भले ही यह स्पेसक्राफ्ट अब काम नहीं कर रहा है, लेकिन यह अभी तुरंत नष्ट नहीं होगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह मृत यान अगले 50 से 100 वर्षों तक मंगल ग्रह की कक्षा में चक्कर काटता रहेगा। इसके बाद यह धीरे-धीरे नीचे गिरकर मंगल की सतह से टकराकर क्रैश हो जाएगा। नासा ने स्पष्ट किया है कि तब तक इससे मंगल के चक्कर काट रहे अन्य एक्टिव अंतरिक्ष यानों को कोई खतरा नहीं होगा।
🏆 क्या रहा ‘MAVEN’ का ऐतिहासिक योगदान?
- नवंबर 2013 में लॉन्च होने के बाद इसने मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल, आयनमंडल और सौर हवाओं (Solar Winds) के साथ होने वाले इंटरैक्शन का गहन अध्ययन किया।
- इसने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि कैसे मंगल ग्रह ने अरबों साल पहले अपने वायुमंडल और पानी को खो दिया, जिसके कारण वह एक रहने योग्य ग्रह से आज एक बंजर मरुस्थल बन चुका है।
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