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अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिलने वाले दान में कथित गबन और हेराफेरी के मामले में एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।
यह कानूनी कार्रवाई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की ओर से दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के बाद की गई है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश रचने जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
🔍 SIT जांच की सिफारिश क्यों की गई थी?
राम मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाले दान और पैसों के लेन-देन में कथित वित्तीय अनियमितताओं (Financial Misappropriation) के आरोप सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था।
- ट्रस्ट की मांग: आरोपों की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था।
- SIT का गठन: ट्रस्ट के इस आग्रह को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मामले की गहराई से जांच करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।

⚖️ शुरुआती रिपोर्ट के बाद कसा कानूनी शिकंजा
एसआईटी ने मामले को अपने हाथ में लेते ही बैंक खातों, दान की रसीदों और संबंधित दस्तावेजों की प्रारंभिक स्क्रूटनी (जांच) शुरू कर दी थी। SIT की शुरुआती रिपोर्ट में गबन और हेराफेरी के प्राथमिक साक्ष्य मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने यह मुकदमा दर्ज किया है।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि दर्ज की गई एफआईआर में मुख्य रूप से इन धाराओं को शामिल किया गया है:
- अमानत में खयानत (Embezzlement)
- धोखाधड़ी और जालसाजी (Cheating)
- अपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)
इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। एसआईटी अपनी विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए आगे के सबूत और गवाहों के बयान दर्ज करने में जुटी हुई है।





