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इछावर (सीहोर)। भीषण गर्मी के बीच इछावर तहसील के ग्रामीण इलाकों में जलसंकट ने विकराल रूप ले लिया है। गिरते जलस्तर, कम बारिश और जल जीवन मिशन के कार्यों में कछुआ चाल के कारण हालात बद से बदतर हो चुके हैं। क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों में जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
⚠️ मुख्यमंत्री से गुहार: ‘पानी दो या आंदोलन झेलो’
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार आवेदन देने के बावजूद अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर संवेदनहीन बने हुए हैं। थक-हारकर ग्रामीणों ने अब मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पीएचई (PHE) मंत्री और जिले की प्रभारी मंत्री तक अपनी शिकायत भेजी है। ग्रामीणों ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं:
- पीएचई विभाग का बजट तत्काल बढ़ाया जाए।
- भीषण गर्मी को देखते हुए सीहोर जिले के लिए कम से कम 100 से अधिक नए नलकूप (ट्यूबवेल) खनन की विशेष स्वीकृति दी जाए।
चेतावनी: रामगढ़ सहित कई प्रभावित गांवों के लोगों ने साफ लफ्जों में कहा है कि यदि जल्द ही पानी का इंतजाम नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगे।
📉 बड़ा खुलासा: बजट में 70% की कटौती, अधिकारियों ने खड़े किए हाथ
इस भीषण जलसंकट के पीछे सिर्फ प्रकृति का प्रकोप नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सरकारी लापरवाही भी एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है।
किसान और समाजसेवी एमएस नेवाड़ा ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि सरकार ने इस बार पीएचई विभाग के बजट में भारी कटौती कर दी है। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक:
- इस साल का लक्ष्य: पूरे जिले के लिए सिर्फ 30 नए नलकूप खनन का बजट मिला है।
- पिछले साल का लक्ष्य: पिछले वर्ष 100 नलकूपों का लक्ष्य था।
- कटौती: बजट में सीधे 70 फीसदी की कटौती की गई है।
बजट न होने के कारण विभागीय अधिकारी भी असहाय नजर आ रहे हैं और संकटग्रस्त गांवों में नए नलकूप खनन का काम पूरी तरह ठप पड़ा है।

📍 गांव-गांव की हकीकत: ग्राउंड रिपोर्ट
तहसील के गांवों में पानी के लिए मचे हाहाकार की जमीनी हकीकत बेहद डरावनी है:
| गांव का नाम | आबादी | हैंडपंपों की स्थिति | वर्तमान स्थिति |
| दौलतपुर | 1800 | 11 हैंडपंप (सभी बंद) | लोग 2 किमी दूर से पानी लाते हैं या टैंकर खरीदते हैं। गरीब लोग झिरिया (गड्ढों) से चुल्लू-भर पानी उलीचकर प्यास बुझा रहे हैं। नल-जल योजना 2 साल से अधूरी है। |
| कुंडीखाल | 1100 (आदिवासी) | 5 में से केवल 1 चालू | जो एक हैंडपंप चालू है, वह भी रुक-रुककर चलता है। एक बाल्टी भरने में एक घंटा लगता है। लोग खेतों में भटक रहे हैं। |
| हरसपुर | 1000 | 8 में से 6 पूरी तरह बंद | बाकी बचे 2 हैंडपंपों में पानी न के बराबर है। दैनिक जरूरतों के लिए भी पानी जुटाना मुश्किल है। |
| हिम्मतपुरा | 800 | दो महीने से भारी संकट | सुबह 5 बजे से ही लोग ट्रैक्टर-टंकी, बैलगाड़ी, बाइक और साइकिल लेकर खेतों की तरफ दौड़ रहे हैं। पूरा दिन सिर्फ पानी जुटाने में बीत रहा है। |
🗣️ जिम्मेदारी का दावा: पीएचई विभाग का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर पीएचई विभाग के एसडीओ ए.के. अहिरवार का कहना है कि जिन गांवों में जलस्तर गिरने से स्रोत सूख गए हैं, वहाँ हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने और सिंगल फेज मोटर डालने का काम किया जा रहा है। साथ ही निजी ट्यूबवेलों को अधिग्रहित कर ग्रामीणों को पानी दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। तहसील में ऐसे करीब 50 गांवों को चिन्हित किया गया है।





