एफिल टावर बंद: BAPS प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को हटाने पर विवाद; हड़ताल के बाद प्रबंधन ने मांगी माफी, जानें पूरा मामला

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drnewsindia.com / पेरिस/डिजिटल डेस्क: फ्रांस की राजधानी पेरिस का विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर (Eiffel Tower) सोमवार को कर्मचारियों की अचानक हड़ताल के कारण बंद रहा। पूरा विवाद शनिवार को हिंदू धार्मिक संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के करीब 100 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के एफिल टावर दौरे के दौरान हुआ।

आरोप है कि BAPS के महंत स्वामी महाराज और साधुओं के दौरे से पहले टावर के प्रबंधन ने कुछ महिला कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी वाली जगह से हटने और वहां पुरुष कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश दिए थे। इस घटना से आहत महिला कर्मचारियों ने इसे अपमानजनक बताया, जिसके बाद सोमवार को वार्ता विफल होने पर कर्मचारियों ने काम ठप्प कर हड़ताल कर दी।

🏛️ राजनीतिक भूचाल: “कोई भी धर्म देश के कानून से ऊपर नहीं”

इस घटना के सामने आने के बाद फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है:

  • इमैनुएल ग्रेगोआर (पेरिस के मेयर): उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और कर्मचारियों के विरोध को पूरी तरह जायज ठहराया।
  • ऑरोर बर्जे (फ्रांस की समानता मंत्री): “फ्रांस में महिलाओं से खुद को छिपाने के लिए नहीं कहा जाता। कोई भी धर्म देश के कानून और समानता से ऊपर नहीं है।”
  • गैब्रियल अताल (पूर्व प्रधानमंत्री): उन्होंने कहा कि आस्था या संस्कृति के नाम पर किसी भी जगह महिलाओं की उपस्थिति और भूमिका तय नहीं की जा सकती।

🚩 BAPS ने जताई संवेदना, मांगी माफी

BAPS संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह एक निजी दौरा था और किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि के लिए नहीं किया गया था।

BAPS का आधिकारिक बयान: “हमारे ध्यान में किसी को भी प्रवेश से रोकने जैसी बात नहीं आई है। हालांकि, यदि इस व्यवस्था से किसी भी कर्मचारी या व्यक्ति को दुख पहुँचा है, तो BAPS इसके लिए दिल से माफी मांगता है।”

टावर प्रबंधन ने भी स्वीकार किया है कि उन्हें इस प्रकार के अनुरोध पर महिला कर्मचारियों को हटाने का निर्णय नहीं लेना चाहिए था।

🔍 विवाद के पीछे ‘अष्टधा ब्रह्मचर्य’ के नियम

BAPS के साधु और स्वामी कठोर नियम यानी अष्टधा ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। इसके तहत वे महिलाओं से दूरी बनाए रखते हैं और सीधा संवाद, स्पर्श या नज़दीकी से बचते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाने का फैसला साधुओं के आग्रह पर हुआ था या स्थानीय प्रबंधन ने स्वतः ही यह कदम उठाया था।

📐 एफिल टावर: इंजीनियरिंग का अद्भुत शाहकार

प्रमुख पहलूविवरण / तथ्य
निर्माण काल26 जनवरी 1887 से 31 मार्च 1889 (2 साल, 2 महीने, 5 दिन)
ऊंचाई व वजन300 मीटर ऊंचा; कुल वजन लगभग 7,300 टन
सामग्री18,038 लोहे के हिस्से और 25 लाख रिवेट (कीले)
डिजाइनर/कंपनीमॉरिस कोएकलिन, एमिल नुगिए, स्टीफन सॉवेस्ट्रे एवं गुस्ताव एफिल

🌬️ हवा और मौसम से मुकाबला करने का विज्ञान:

  1. जालीदार डिज़ाइन: टावर का ढांचा जालीदार है, जिससे तेज हवाएं टकराने के बजाय आर-पार निकल जाती हैं और दबाव कम बनता है।
  2. तापमान का प्रभाव: गर्मी में लोहा फैलने के कारण इसकी ऊंचाई में मामूली वृद्धि होती है और तेज हवा में यह हल्का झूलता है, जिसे सहन करने के लिए इसे फ्लेक्सिबल बनाया गया है।
  3. मेंटेनेंस: जंग से बचाने के लिए औसतन हर 7 साल में टावर पर दोबारा पेंट किया जाता है। अब तक लगभग 20 बार इस पर पेंट किया जा चुका है।

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