एमपी में सूखे की आहट: मौसम विभाग की चेतावनी के बाद एक्शन में सरकार; उज्जैन संभाग सहित 24 जिलों के लिए ‘विशेष माइक्रो प्लान’ तैयार

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drnewsindia.com

MP Weather & Agriculture Update (05 July 2026): मध्य प्रदेश में इस बार मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की आशंका के बीच राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के बाद सरकार ने संभावित सूखे से निपटने के लिए प्रदेश के 24 जिलों के लिए एक विशेष कार्ययोजना लागू कर दी है।

सबसे अधिक चिंता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह संभाग उज्जैन को लेकर है, जहाँ इस सीजन में सबसे कम बारिश होने की आशंका जताई गई है। राजस्व और कृषि विभाग ने सूखे जैसी स्थिति बनने से पहले ही जमीनी स्तर पर राहत और बचाव की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

📌 संकट और सरकार की तैयारी: मुख्य कड़ियाँ (Key Highlights)

  • 📉 बारिश की कमी: 1 जून से 1 जुलाई तक सामान्य 139.7 मिमी की तुलना में महज 92.4 मिमी बारिश हुई (47 मिमी का घाटा)।
  • 🚨 विशेष निगरानी: 24 जिलों के लिए एडवाइजरी जारी; 7 प्रभावित जिलों में विस्तृत ‘माइक्रो प्लानिंग’ शुरू।
  • 🌾 खेती में बदलाव: किसानों को कम पानी और कम अवधि वाली फसलें अपनाने की सलाह।
  • 💰 राहत फंड तैयार: राजस्व विभाग के पास तत्काल राहत कार्यों के लिए ₹20.9 करोड़ उपलब्ध।

📉 आखिर क्यों पैदा हुई सूखे की आशंका? जानें आंकड़े

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून के दूसरे चरण में भी बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।

  • इस साल मध्य प्रदेश में सामान्य वर्षा का केवल 90% से 94% होने का ही पूर्वानुमान है।
  • प्रदेश के कई जिलों में जून के महीने में ही सामान्य से 20% से 60% तक वर्षा घाटा (Rainfall Deficit) दर्ज हो चुका है।
  • यदि जुलाई और अगस्त के मुख्य महीनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो खरीफ फसलों (विशेषकर सोयाबीन, धान) के उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।

🚜 किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन: अब कैसे होगी खेती?

कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों तक तकनीकी निगरानी और मौसम आधारित सलाह मोबाइल व सोशल मीडिया द्वारा पहुंचाई जा रही है:

1. फसलों का चयन: किसानों को पारंपरिक फसलों के बजाय कम अवधि और कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह दी जा रही है। इस बार दलहन (दालें), तिलहन और मोटे अनाज (मिलेट्स) का रकबा बढ़ाने पर जोर रहेगा।

2. वैज्ञानिक तकनीक: कम पानी में बेहतर उत्पादन के लिए रिज एंड फरो (Ridge and Furrow), रेज्ड बेड (Raised Bed) और डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR – धान की सीधी बुआई) जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

💧 बीज, सिंचाई और जल संरक्षण के लिए सरकारी इंतजाम

  • वैकल्पिक बीज वितरण: सरकार ने कम पानी वाली फसलों के प्रमाणित बीजों का पर्याप्त स्टॉक तैयार कर लिया है, ताकि समय पर किसानों को बैकअप बीज मिल सके।
  • मनरेगा से जल संवर्धन: जल स्तर बनाए रखने के लिए मनरेगा के तहत ‘खेत तालाब’, जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण और पुरानी नहरों/बावड़ियों की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया जा रहा है।
  • सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation): उपलब्ध जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग करने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पद्धतियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

🏛️ हालात बिगड़े तो क्या है सरकार का ‘प्लान-बी’?

राजस्व विभाग ने वर्ष 2020 की सूखा नीति (Drought Policy) के अनुसार अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं:

  • सूखे की घोषणा: खरीफ फसलों के नुकसान का आकलन कर 31 अक्टूबर 2026 तक और रबी फसलों के लिए 31 मार्च 2027 तक आधिकारिक रूप से सूखा घोषित किया जा सकेगा।
  • फंड और मैनेजमेंट: राहत कार्यों के लिए शुरुआती ₹20.9 करोड़ आवंटित हैं, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बजट जारी होगा। सभी प्रभावित जिलों में ‘क्राइसिस मैनेजमेंट प्लान’ लागू कर नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है।

स्रोत: राजस्व एवं कृषि कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश शासन एवं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी संयुक्त प्रेस बुलेटिन।

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