drnewsindia.com/नई दिल्ली
भारत द्वारा पाकिस्तान और PoK में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर अब देश के भीतर एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने सरकार पर इस ऑपरेशन में शहीद हुए 6 भारतीय जवानों की जानकारी एक साल तक छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, रक्षा मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए तथ्यात्मक जवाब जारी किया है।
आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और दोनों पक्षों के क्या तर्क हैं।
📌 कांग्रेस का क्या आरोप है?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया (X) पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक पुराने संसदीय भाषण का वीडियो शेयर करते हुए सरकार को घेरा।
- नाम छिपाने का आरोप: कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने इन 6 जवानों की शहादत को एक साल तक सार्वजनिक नहीं किया, जिससे उन्हें वह सम्मान समय पर नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
- संसद को गुमराह करने का दावा: पवन खेड़ा ने कहा, “या तो रक्षा मंत्री को उस समय छह जवानों की शहादत की जानकारी नहीं थी या उन्होंने संसद को गुमराह किया। दोनों ही स्थितियां बेहद गंभीर हैं।”
🛡️ रक्षा मंत्रालय का पलटवार: “आरोप पूरी तरह गलत और भ्रामक”
रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस के दावों और सोशल मीडिया पोस्ट्स का खंडन करते हुए साफ किया कि शहीदों के सम्मान में कोई देरी नहीं हुई है और न ही कोई जानकारी छिपाई गई। मंत्रालय ने अपनी बात को साबित करने के लिए पूरा टाइमलाइन (क्रम) जारी किया है:
🗓️ कब-कब दिया गया शहीदों को सम्मान?
- 11 मई 2025: तत्कालीन सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) ने एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन जवानों को सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी थी।
- 14 अगस्त 2025: एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए इन सभी शहीदों को वीरता पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई थी।
- 8 अक्टूबर 2025: वायुसेना प्रमुख ने खुद शहीद सार्जेंट के परिजनों को सम्मानित किया।
- 15 जनवरी 2026: सेना दिवस परेड के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीदों के परिजनों को ‘सेना मेडल (वीरता)’ प्रदान किया।
- 26 जून 2026: राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) की दीवार पर तय प्रोटोकॉल के तहत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ खंड में सभी 6 शहीदों के नाम दर्ज किए गए।

रक्षा मंत्री के बयान पर सफाई: रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राजनाथ सिंह के 28 जुलाई 2025 के बयान को संदर्भ से अलग (Out of Context) करके दिखाया जा रहा है। रक्षा मंत्री दरअसल विपक्ष के उन दावों का खंडन कर रहे थे जिसमें भारतीय विमानों के गिरने की बात कही जा रही थी।
⚡ क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’? (Flshback)
यह विवाद जिस ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर है, वह भारतीय सेना द्वारा आतंकवाद के खिलाफ की गई एक बेहद बड़ी और सफल कार्रवाई थी।
- 6 मई 2025 को हुई एयरस्ट्राइक: भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में छिपे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक और भीषण हमले किए थे।
- 100 से ज्यादा आतंकी ढेर: इस ऑपरेशन में भारत ने 100 से अधिक खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया था।
- पाकिस्तानी एयरबेस तबाह: प्राइवेट सैटेलाइट कंपनी ‘मैक्सर’ (Maxar) द्वारा जारी तस्वीरों में साफ हुआ था कि भारत के इस हमले में पाकिस्तान के सरगोधा, नूर खान, भोलारी और सुक्कुर एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचा था।

📍 सेना ने इन 9 बड़े आतंकी कैंपों को किया था नेस्तनाबूद:
- सवाई नाला ट्रेनिंग सेंटर (मुजफ्फराबाद, PoK) – जहाँ गुलमर्ग और पहलगाम हमलों के आतंकियों को ट्रेनिंग मिली थी।
- सैयदना बिलाल कैंप (मुजफ्फराबाद) – हथियार और जंगल सर्वाइवल ट्रेनिंग सेंटर।
- गुरपुर कैंप (कोटली) – पुंछ में श्रद्धालुओं पर हमला करने वाले आतंकियों का गढ़।
- बरनाला कैंप (भिम्बर) – हथियार चलाने की ट्रेनिंग का मुख्य केंद्र।
- अब्बास कैंप (कोटली) – एलओसी से महज 13 किमी दूर स्थित फिदायीन तैयार करने वाला कैंप।
- सरजल कैंप (सियालकोट) – पुलिस जवानों की हत्या करने वाले आतंकियों का ठिकाना।
- हिजबुल महमूना जाया कैंप (सियालकोट) – जहाँ पठानकोट हमले की प्लानिंग हुई थी।
- मरकज तैयबा कैंप (मुरीदके) – अजमल कसाब का पुराना ट्रेनिंग कैंप।
- मस्जिद सुभान अल्लाह (बहावलपुर) – जैश-ए-मोहम्मद का मुख्य हेडक्वार्टर।
इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के DGMO के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई थी। सरकार का कहना है कि इस पूरे ऑपरेशन में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सभी निर्धारित सुविधाएं पूरी तरह से उपलब्ध कराई गई हैं।





