किसानों को बड़ी राहत की तैयारी: फसल ऋण अवधि 31 मार्च से बढ़ाकर 31 मई करने पर विचार

0
5

drnewsindia.com/भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा कदम उठाने की दिशा में संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि फसल ऋण या संबंधित वित्तीय वर्ष की अवधि को 31 मार्च के बजाय बढ़ाकर 31 मई तक करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि किसान लोन डिफॉल्टर न बनें और उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बदलाव से किसानों को अपनी फसल बिक्री और आय के अनुसार ऋण चुकाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, जिससे वे डिफॉल्टर की स्थिति से बच सकेंगे।

सहकारी समितियों में गड़बड़ी पर सख्ती, लेकिन किसानों को राहत जारी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्राथमिक सहकारी समितियों (पेक्स) में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा गड़बड़ी की जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में पूरी समिति को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि दोषी व्यक्ति पर कार्रवाई होगी, न कि पूरी सहकारी व्यवस्था पर, ताकि किसानों की सेवाएं बाधित न हों।

सहकारिता से समृद्धि का लक्ष्य: “बिना सहकार, नहीं उद्धार”

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अपेक्स बैंक परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता के माध्यम से किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश को “मिल्क कैपिटल” बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि दूध उत्पादन बढ़ाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से 1 लाख पौधे रोपे गए

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान 2.0 के तहत प्रदेशभर में व्यापक पौधरोपण किया गया। अपेक्स बैंक के नेतृत्व में 4,500 से अधिक सहकारी समितियों और 38 जिला सहकारी बैंकों के सहयोग से एक ही दिन में लगभग 1 लाख पौधे लगाए गए।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसे बड़ा करने की जिम्मेदारी भी निभाएं।

पर्यावरण और सहकारिता पर सरकार का फोकस

कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण और सहकारिता दोनों क्षेत्रों में लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष लगाए गए पौधों में से अधिकांश आज भी सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग प्रदेश में “दुग्ध क्रांति” लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह ग्रामीण विकास का बड़ा आधार बनेगा।

नाबार्ड ने मुख्यमंत्री को भेंट की “आम की टोकरी”

कार्यक्रम के अंत में नाबार्ड की सीजीएम सुश्री सी. सरस्वती ने मुख्यमंत्री को विश्व पर्यावरण दिवस की स्मृति स्वरूप “आम की टोकरी” भेंट की और शुभकामनाएं दीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here