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गुना। शहर के एक निजी होटल में युवा लेखक हार्दिक डावर (पुत्र गुलशन डावर) की आत्म-अन्वेषण और जीवन के संघर्षों पर आधारित प्रेरणादायक पुस्तक ‘फ्रॉम जीरो टू जीरो: द रेजोनेंस ऑफ बीइंग’ (From Zero to Zero: The Resonance of Being) का भव्य विमोचन किया गया। इस गरिमामय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भोपाल डीआईजी (DIG) अवधेश गोस्वामी और विशिष्ट अतिथि के तौर पर गुना एसपी (SP) हितिका वासल मौजूद रहीं।
123 पेज की इस किताब को कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने युवाओं के लिए सकारात्मक सोच और आत्मचिंतन का एक बेहतरीन प्रेरणास्रोत बताया है।

🧠 DIG बोले- “29 साल के नौजवान में 70 वर्ष के परिपक्व व्यक्ति जैसी चेतना”
मुख्य अतिथि भोपाल डीआईजी अवधेश गोस्वामी ने लेखक की गहराई और उनकी सोच की सराहना करते हुए कहा:
“पुस्तक का शीर्षक (Title) इस बात का गवाह है कि हार्दिक की चेतना का विकास हो चुका है। इस तरह के गंभीर टाइटल की उम्मीद किसी 29 साल के नौजवान से अमूमन नहीं की जाती है, यह 65-70 वर्ष के किसी परिपक्व व्यक्ति की सोच की तरह लगता है। एक पिता के भाग्य से ही पुत्र के धर्म और कर्म का निर्माण होता है, जो हार्दिक में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।”
📖 एसपी हितिका वासल: “पढ़ते समय वक्त का ध्यान ही नहीं रहा”
विशिष्ट अतिथि एसपी हितिका वासल ने पुस्तक की रोचकता और इसकी बांधकर रखने वाली शैली का जिक्र करते हुए कहा कि वे इसे पढ़ते समय इतनी तल्लीन हो गईं कि उन्हें समय का ध्यान ही नहीं रहा।
वहीं, जीएसटी भोपाल के सहायक आयुक्त बलराम धाकड़ ने कहा, “123 पेज की यह किताब हम सभी के जीवन की कहानी है। यह हमारे अस्तित्व की ही अनुगूंज है।”

💔 पिता ने साझा किया भावुक पल: “जब बेटा डिप्रेशन में था…”
समारोह का सबसे भावुक क्षण वह था जब लेखक के पिता गुलशन डावर ने मंच से अपने बेटे के संघर्ष और अवसाद (डिप्रेशन) के दौर की कहानी साझा की:
- लीक से हटकर काम: उन्होंने कहा कि एक पिता के नाते बेटे के सिर्फ अच्छे नंबर लाने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका लीक से हटकर कुछ सार्थक काम करना है।
- जीवन का टर्निंग पॉइंट: उन्होंने वह दौर याद किया जब हार्दिक अवसाद में चला गया था। गुलशन डावर ने बताया, “तब मैंने उसे समझाया था कि अगर तुम्हारा शरीर तुम्हारे साथ है, तो ईश्वर भी तुम्हारे साथ है। जो तुम्हारा था ही नहीं, वही अब तुम्हारे पास नहीं है।” यही सीख हार्दिक के जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी, जिससे उबरकर वह आज पूरे आत्मविश्वास के साथ समाज के सामने खड़ा है।
✍️ लेखक हार्दिक डावर: “लिखने से कम होता है जीवन का दबाव”
अपनी पुस्तक और विचारों पर चर्चा करते हुए युवा लेखक हार्दिक डावर ने कहा कि यह किताब आत्म-अन्वेषण, संघर्ष और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने की एक कोशिश है।
- सुख-दुख को समान भाव से अपनाएं: इंसान जब सुख और दुख को एक समान भाव से स्वीकार करना सीख जाता है, तभी उसे जीवन का असली आनंद मिलता है।
- तनावमुक्ति का साधन: हार्दिक ने लेखन को एक बेहतरीन थेरेपी बताते हुए कहा कि लिखने से मन हल्का होता है और जीवन का मानसिक दबाव काफी कम हो जाता है।
🤝 ‘मीट एंड ग्रीट’ सत्र के साथ गरिमामय आयोजन
इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत ‘मीट एंड ग्रीट’ सत्र से हुई, जिसमें उपस्थित पाठकों, युवाओं और अतिथियों ने लेखक से सीधा संवाद किया और पुस्तक की प्रेरणा के बारे में विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर जीएसटी भोपाल के सहायक आयुक्त संदीप श्रीवास्तव विशेष रूप से मौजूद रहे। इनके साथ ही बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, प्रशासनिक अधिकारी और आम नागरिक कार्यक्रम का हिस्सा बने। कार्यक्रम का सफल संचालन सुनील जैन ने किया, जबकि अंत में सभी अतिथियों का आभार लेखक की पत्नी अनन्या डावर ने व्यक्त किया।





