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डिजिटल डेस्क | नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में आज, 11 सितंबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में नरमी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमत में ₹3,742 प्रति किलो की बड़ी गिरावट आई है, वहीं 24 कैरेट सोने का भाव ₹269 प्रति 10 ग्राम घटकर नीचे आ गया है।
पिछले 15 दिनों के रुझान को देखें तो चांदी कुल ₹13,000 और सोना ₹7,000 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है।
📉 आज का ताज़ा भाव और 15 दिनों का बदलाव
| धातु (Metal) | आज का भाव (11 सितं) | 15 दिन पहले का भाव (28 अग) | कुल गिरावट (15 दिन में) |
| सोना (24 कैरेट, प्रति 10g) | ₹1.53 लाख | ₹1.60 लाख | 🔻 ₹7,000 सस्ता |
| चांदी (प्रति 1 किलोग्राम) | ₹2.30 लाख | ₹2.44 लाख | 🔻 ₹13,000 सस्ता |

📈 साल 2026 में अब तक की चाल: सोना ₹20 हजार महंगा
वर्ष 2026 में सोने-चांदी के दामों में लगातार भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है:
- सोने की बढ़त: 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1.33 लाख थी, जो इस साल अब तक ₹20,000 की बढ़त बनाकर ₹1.53 लाख पर पहुँची है।
- ऑलटाइम हाई: इसी साल 29 जनवरी 2026 को सोने ने ₹1.76 लाख और चांदी ने ₹3.86 लाख प्रति किलो का अपना ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर (All-time High) बनाया था।
🔮 क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? (दिसंबर 2026 का अनुमान)
कोटक सिक्युरिटीज के सीनियर वीपी एवं कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के अनुसार:
“सोने को आम निवेशकों के साथ-साथ आरबीआई (RBI) जैसे दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों का मजबूत सपोर्ट हासिल है, जो लगातार खरीदारी कर रहे हैं। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए दिसंबर 2026 तक सोना ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹3 लाख प्रति किलो के स्तर तक पहुँच सकती है।”

🛍️ ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय रखें इन 3 बातों का ध्यान
अगर आप सोने के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन महत्वपूर्ण बातों को ज़रूर जांचें:
- 1. BIS हॉलमार्क सर्टिफाइड गोल्ड ही लें: आभूषण पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का 6 अंकों वाला अल्फान्यूमेरिक हॉलमार्क कोड (जैसे-
AZ4524) जरूर चेक करें। - 2. सही रेट क्रॉस-चेक करें: खरीदारी के दिन 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के आधिकारिक भाव IBJA जैसी प्रामाणिक वेबसाइट्स से मिलाकर ही सौदा तय करें।
- 3. मेकिंग चार्ज पर मोलभाव करें: ज्वेलर्स द्वारा लिया जाने वाला मेकिंग चार्ज फिक्स नहीं होता। बड़ी खरीदारी पर लेबर कॉस्ट का ब्रेकअप मांगें और मेकिंग चार्ज कम करने के लिए बारगेन करें।




