जमीन की लूट बंद करो! भोपाल में जुटे देश-प्रदेश के दिग्गज जन-आंदोलनकारी, जबरन बेदखली के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान का ऐलान

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drnewsindia.com

Bhopal News Today: भोपाल के ऐतिहासिक गांधी भवन में ‘भूमि अधिकार आंदोलन’ की मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसान, आदिवासी, वनाधिकार संगठनों, श्रमिक संगठनों और जन आंदोलनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

आंदोलनकारियों ने एक सुर में नारा दिया—“जमीन की लूट बंद करो, जबरन बेदखली मंजूर नहीं!” बैठक में सरकार से मांग की गई कि जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार स्थानीय समुदायों का है, इसलिए ‘विस्थापन-विहीन विकास मॉडल’ को तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

📌 बैठक की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • आयोजन स्थल: गांधी भवन, भोपाल।
  • प्रमुख उपस्थिति: अशोक चौधरी (गुजरात), कुसुम रावत (राजस्थान), डॉ. सुनीलम (वरिष्ठ किसान नेता), प्रहलाद दास बैरागी, एड. आराधना भार्गव, एड. शिव सिंह, अमुल्य निधि और भगवान सेप्टा।
  • संचालन: बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिन्हा ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
  • मुख्य एजेंडा: भूमि अधिग्रहण, अंधाधुंध खनन, कॉरपोरेट कब्जा, वनाधिकार और विस्थापितों का पुनर्वास।

🚨 सीहोर शक्कर फैक्ट्री की 5400 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर का मुद्दा प्रमुखता से गूंजा। किसान नेता प्रहलाद दास बैरागी ने शासन-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

“सीहोर में जो शक्कर फैक्ट्री बंद पड़ी है, उसकी 5,400 एकड़ बेशकीमती भूमि पर राजनेताओं का अवैध कब्जा है। हम पुरजोर मांग करते हैं कि इस भूमि को तुरंत अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, फैक्ट्री को दोबारा चालू किया जाए ताकि पूर्व की तरह गन्ना उत्पादन बढ़ सके। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा, इथेनॉल की आपूर्ति होगी और राष्ट्रीय आय में भी बढ़ोतरी होगी।”

⚠️ मंच से गूंजीं विस्थापन, प्रदूषण और बीमारी की ये बड़ी चुनौतियाँ:

  • सिंगरौली (एड. अशोक पैगाम): बिजली उत्पादन और कोयला परियोजनाओं के नाम पर हजारों परिवारों को विस्थापित किया जा रहा है और अंधाधुंध जंगल काटे जा रहे हैं।
  • गंजाल–मोरांड बांध परियोजना (सरदार देवड़ा और रामप्रसाद काजले): इस प्रोजेक्ट के कारण लगभग 2,500 हेक्टेयर वन भूमि डूब क्षेत्र में आ रही है, जिससे बड़ी संख्या में आदिवासी और गरीब परिवार बेघर होने की कगार पर हैं।
  • झाबुआ सिलिकोसिस पीड़ित संघ (आशीष एवं मोहन सुल्या): फैक्ट्रियों के प्रदूषण से मजदूर ‘सिलिकोसिस’ जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और अनास नदी के बढ़ते प्रदूषण से किसानों की उपजाऊ खेती बर्बाद हो रही है।
  • मालवा क्षेत्र (मनीष श्रीवास्तव, AIKMS): गुना और राजगढ़ सहित कई जिलों में कॉरपोरेट कंपनियों के फायदे के लिए किसानों की उपजाऊ जमीनों का जबरन अधिग्रहण तेज हो गया है।
  • केन-बेतवा परियोजना: बैठक में केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विस्थापितों के मकानों को जबरन तोड़े जाने की कड़ी निंदा की गई।

⚖️ ‘भूरिया समिति’ और ग्राम सभा की अनुमति के बिना कुछ भी मंजूर नहीं

भारत जन आंदोलन के विजय भाई ने कहा कि मध्य प्रदेश में वर्ष 1998-99 में ही भूरिया समिति के ढांचे को स्वीकार किया गया था। इस नियम के अनुसार, अनुसूचित (आदिवासी) क्षेत्रों में ग्राम सभा सबसे शक्तिशाली है।

ग्राम सभा की लिखित सहमति के बिना सरकार एक इंच जमीन का भी हस्तांतरण या अधिग्रहण नहीं कर सकती। विकास की ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें विनाश और विस्थापन न हो।

📝 आगामी रणनीति: भूमि अधिकार आंदोलन के 5 बड़े संकल्प

बैठक के अंत में आंदोलन की आगामी रूपरेखा तय करते हुए निम्नलिखित रणनीतियों पर सहमति बनी:

  1. राज्यव्यापी संयुक्त अभियान: मध्य प्रदेश में जबरन भूमि अधिग्रहण और बेदखली के खिलाफ एक बड़ा जमीनी आंदोलन चलाया जाएगा।
  2. 🔄 साझा समन्वय तंत्र: प्रदेश के सभी संघर्षरत क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के लिए एक रेगुलर स्टेट-लेवल नेटवर्क तैयार होगा।
  3. 📜 कानूनों का सख्ती से पालन: भूमि अधिग्रहण कानून 2013, वनाधिकार कानून, पेसा (PESA) एक्ट और संविधान की 5वीं व 6ठी अनुसूची को पूर्ण रूप से लागू कराने के लिए जनता को जागरूक किया जाएगा।
  4. 📊 सरकारी लूट का दस्तावेज़ीकरण: कॉरपोरेट कब्ज़ों, वनभूमि हस्तांतरण और पुनर्वास की जमीनी हकीकत पर एक विस्तृत रिपोर्ट (डॉक्यूमेंटेशन) तैयार की जाएगी।
  5. 🛡️ दमन के खिलाफ एकजुटता: आंदोलनकारियों पर दर्ज होने वाले झूठे मुकदमों और पुलिसिया दमन के खिलाफ सामूहिक रूप से कानूनी और सामाजिक प्रतिरोध किया जाएगा।

आंदोलन से जुड़ने के लिए संपर्क सूत्र: 9425006716, 9425146991, 91317 76606 स्रोत: भूमि अधिकार आंदोलन (मध्य प्रदेश) द्वारा गांधी भवन, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति।

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