drnewsindia.com/ नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के लाभार्थियों को मिलने वाले सबसिडी वाले एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की है। अब गरीब परिवारों को साल में 9 की जगह केवल 4 सिलेंडरों पर ही सबसिडी मिलेगी। सरकार ने यह फैसला बढ़ते बजट घाटे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लिया है।
यह घोषणा घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी के ठीक एक दिन बाद सामने आई है।
इस फैसले का किस पर और क्या असर होगा?
- 10.5 करोड़ परिवारों पर असर: देश के लगभग 10.5 करोड़ गरीब परिवार जो उज्ज्वला योजना से जुड़े हैं, वे इस कटौती से सीधे प्रभावित होंगे।
- ₹300 की सबसिडी सिर्फ 4 बार: उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलने वाली ₹300 प्रति सिलेंडर की अतिरिक्त सबसिडी अब साल में अधिकतम 4 रीफिल (सिलेंडर भरवाने) पर ही मिलेगी।
- औसत खपत का हवाला: सरकार का कहना है कि एक आम उज्ज्वला परिवार साल भर में औसतन 4 सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है, इसलिए यह सीमा तय की गई है।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण एम. खनूजा ने इस फैसले के पीछे वित्तीय बोझ का हवाला दिया है:
तेल कंपनियों को भारी नुकसान: सरकारी तेल कंपनियों को आज भी हर 14.2 किलो के सिलेंडर पर ₹700 का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा पेट्रोल पर ₹6 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर का नुकसान (Under-recovery) हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय संकट: पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल है, जिससे कच्चे तेल और गैस के दाम बढ़ रहे हैं। बढ़ता सबसिडी बिल: साल 2025-26 में घरेलू एलपीजी पर कुल घाटा बढ़कर ₹60,000 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल ₹41,338 करोड़ था।
आम उपभोक्ताओं को राहत जारी: मंत्रालय के अनुसार, देश के सभी 33.37 करोड़ रसोई गैस उपभोक्ताओं को अभी भी बाजार रेट की तुलना में लगभग ₹700 सस्ता सिलेंडर मिल रहा है, जिसका खर्च सरकार और तेल कंपनियां उठा रही हैं।
उज्ज्वला योजना: 12 से घटकर 4 सिलेंडरों का सफर
- 2016 (शुरुआत): उत्तर प्रदेश के बलिया से मुफ्त गैस कनेक्शन देने के साथ योजना की शुरुआत हुई।
- मई 2022: सरकार ने साल में 12 सिलेंडरों पर ₹200 की सबसिडी देना शुरू किया, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹300 कर दिया गया।
- अगस्त 2025: कैबिनेट ने साल 2025-26 के लिए सिलेंडरों की संख्या घटाकर 9 कर दी थी।
- अब (2026): इसे और घटाकर अब केवल 4 सिलेंडर प्रति वर्ष कर दिया गया है।

बढ़ रही थी खपत:
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उज्ज्वला उपभोक्ताओं की सालाना औसत सिलेंडर खपत जो 2019-20 में केवल 3 सिलेंडर थी, वह 2024-25 में बढ़कर 4.47 सिलेंडर हो गई थी। लेकिन अब सबसिडी सीमित होने से गरीब परिवारों के बजट पर असर पड़ना तय है।




