drnewsindia.com
पटना। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सहयोग तथा विश्वा, पटना (Vital Invention of Social Harmony with Art) के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय लोक नाट्य महोत्सव “पटरंगम 2026 – पटना रंग महोत्सव” का रविवार को प्रेमचंद रंगशाला, राजेंद्र नगर में सफलतापूर्वक समापन हुआ। तीन दिनों तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में रंगमंच के माध्यम से सामाजिक सरोकारों और जनचेतना से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
महोत्सव के अंतिम दिन रंगप्रेमियों की बड़ी संख्या प्रेमचंद रंगशाला पहुंची। समापन समारोह में रंगकर्मी, साहित्यकार, कलाकार और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि रंगमंच समाज में सकारात्मक बदलाव और जागरूकता का सशक्त माध्यम है तथा ऐसे आयोजनों की निरंतरता आवश्यक है।
‘तुमका का बताएं भईया’ ने दिखाई समाज की सच्चाई
शाम 5:30 बजे आयोजित नुक्कड़ नाटक सत्र में नाद, पटना की टीम ने “तुमका का बताएं भईया” का मंचन किया। लेखक अभिषेक चौहान और निर्देशक मो. जानी के इस नाटक में आम जनजीवन की समस्याओं, सामाजिक विसंगतियों और बदलते परिवेश की चुनौतियों को व्यंग्यपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ सामाजिक मुद्दों पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया।
‘प्रेम की वेदी’ ने उठाए जातिवाद और दहेज जैसे सवाल
शाम 6:30 बजे इमैजिनेशन, बिहार द्वारा मुंशी प्रेमचंद की कालजयी रचना “प्रेम की वेदी” का मंचन किया गया। युवा निर्देशक सत्यम कुमार सिंह ने इस क्लासिक नाटक को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए जातिवाद, दहेज प्रथा, बेमेल विवाह, ऑनर किलिंग और सामाजिक असमानता जैसे गंभीर विषयों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।
नाटक की कहानी दो प्रेमियों के संघर्ष पर आधारित रही, जो सामाजिक बंधनों और रूढ़िवादी सोच के कारण अपने रिश्ते को बचाने की जद्दोजहद करते हैं। प्रस्तुति ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि समाज की कुप्रथाएं आज भी अनेक लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं।

कलाकारों के अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल
नाटक में सत्यम कुमार सिंह (योगराज), जानवी सोनी (जेनी), रितिका उपाध्याय, पीयूष ओझा, अभीरथ सोनू, सुमित कुमार, रूपाली और खुशी ने प्रभावशाली अभिनय किया। वहीं प्रकाश व्यवस्था, सेट डिज़ाइन, ध्वनि संचालन, वेशभूषा और मंच संचालन से जुड़े तकनीकी दल ने भी प्रस्तुति को यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तीन दिनों तक सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित रहीं प्रस्तुतियां
“पटरंगम 2026” के दौरान बिहार के विभिन्न रंग समूहों ने पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, न्याय व्यवस्था, सामाजिक कुरीतियों, प्रशासनिक विसंगतियों और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों पर नुक्कड़ नाटक और रंगमंचीय प्रस्तुतियां दीं। महोत्सव में बड़ी संख्या में कलाकारों, साहित्यकारों और कला प्रेमियों ने सहभागिता की।
समापन अवसर पर आयोजकों ने कहा कि पटरंगम 2026 का उद्देश्य केवल नाट्य प्रस्तुतियां करना नहीं, बल्कि रंगमंच के माध्यम से समाज में संवाद, संवेदना और सकारात्मक परिवर्तन की भावना को मजबूत करना है। सफल आयोजन के लिए कलाकारों, तकनीकी सहयोगियों, दर्शकों और कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया गया।





