drnewsindia.com/ rajgarh
मुख्य बिंदु:
- जनाधार की वापसी: प्रियव्रत सिंह ने कहा कि बंगाल चुनाव में कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की है। हालांकि यह संख्या कम है, लेकिन 2021 के शून्य के मुकाबले यह पार्टी के खोए हुए जनाधार को वापस पाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
- भाजपा की जीत पर प्रहार: उन्होंने तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत (207 सीटें) जनता के स्थायी वैचारिक झुकाव का परिणाम नहीं है, बल्कि तत्कालीन सत्ता (TMC) के खिलाफ बने राजनीतिक समीकरणों का फल है।
- इतिहास का हवाला: प्रियव्रत सिंह ने माना कि 90 के दशक और 2000 की शुरुआत में पार्टी विभाजन और संगठनात्मक कमजोरी के कारण कांग्रेस बंगाल में हाशिए पर चली गई थी।
- अगले 5 साल का रोडमैप: उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले 5 वर्षों में कांग्रेस का ध्यान जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता के बीच फिर से विश्वास पैदा करने पर होगा।
चुनाव परिणाम एक नजर में (2026):
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के हालिया रुझानों/परिणामों के अनुसार:
| पार्टी | सीटें (लगभग) | स्थिति |
| भाजपा (BJP) | 207 | बहुमत के साथ सरकार बनाने को तैयार |
| तृणमूल कांग्रेस (TMC) | 80 | भारी गिरावट के साथ विपक्ष में |
| कांग्रेस (INC) | 02 | शून्य से बढ़कर वापसी की शुरुआत |
| अन्य | 05 | वाम दल और निर्दलीय शामिल |
“बंगाल की जनता आज भी मानसिक रूप से भाजपा और RSS की विचारधारा के साथ पूरी तरह नहीं है। लोगों ने विकल्प की तलाश में मतदान किया है, जो कांग्रेस के लिए भविष्य में एक नया अवसर है।”
— प्रियव्रत सिंह, जिलाध्यक्ष, राजगढ़ कांग्रेस
निष्कर्ष:
प्रियव्रत सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पहली बार अपनी सरकार बनाने जा रही है। कांग्रेस इस छोटे बदलाव को अपने ‘संगठन सृजन अभियान’ की सफलता के रूप में देख रही है।




