बालोतरा में गुरु-शिष्य के प्रेम की अनूठी तस्वीर: प्रिंसिपल और 3 टीचरों के ट्रांसफर पर फूट-फूटकर रोईं छात्राएं; स्कूल पर जड़ा ताला, प्रशासन को झुकना पड़ा

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Rajasthan Local Desk (11 July 2026): राजस्थान के बालोतरा जिले से सोशल मीडिया को झकझोर देने वाली और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बेहद भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ धोरीमना इलाके के ‘गेनाणियों का तला’ गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल और तीन ग्रेड सेकेंड शिक्षकों का ट्रांसफर होने से स्कूली बच्चे इस कदर आहत हुए कि वे स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़कर धरने पर बैठ गए।

शिक्षकों से अलग होने के गम में छोटी-छोटी स्कूली बच्चियां शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के सामने फूट-फूटकर रोने लगीं। बच्चों के इस अगाध स्नेह और परिजनों के भारी विरोध के आगे आखिरकार शिक्षा विभाग को झुकना पड़ा और तुरंत बीच का रास्ता निकालते हुए तीनों शिक्षकों को वापस इसी स्कूल में डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर लगाने के आदेश जारी करने पड़े।

📌 इस भावुक घटनाक्रम की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 📍 घटनास्थल: शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गेनाणियों का तला, धोरीमना इलाका (जिला बालोतरा)।
  • 🥺 आंसुओं का सैलाब: ट्रांसफर की खबर सुनते ही रोने लगे बच्चे; माता-पिता के साथ मिलकर स्कूल गेट पर ठोका ताला।
  • 👨‍🏫 इनका हुआ था तबादला: प्रिंसिपल देवाराम चौधरी, सीनियर टीचर रेखाराम, देरावर सिंह और जगमाराम।
  • 🏛️ प्रशासन का यू-टर्न: ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली, उच्चाधिकारियों की हरी झंडी के बाद 3 शिक्षकों को डेपुटेशन पर वापस रोका।

🔒 “या तो ट्रांसफर रद्द करो, या हमारे बच्चों की TC दो”— परिजनों का फूटा गुस्सा

दरअसल, राज्य सरकार द्वारा 10 जुलाई तक विभिन्न विभागों में किए जा रहे तबादलों के तहत इस स्कूल के स्तंभ माने जाने वाले प्रिंसिपल और तीन वरिष्ठ अध्यापकों की ट्रांसफर लिस्ट जारी हुई थी। जैसे ही यह खबर बच्चों तक पहुंची, स्कूल परिसर में सन्नाटा पसर गया।

परिजनों का कहना है कि इस सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल में 300 से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं और कुल 10 लोगों का स्टाफ है। एक साथ 4 मुख्य कड़ियों (प्रिंसिपल और 3 सीनियर टीचर्स) के चले जाने से बच्चों की बोर्ड परीक्षाओं और दैनिक पढ़ाई की पूरी व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर जाती। इसी नाराजगी में ग्रामीणों और बच्चों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दो टूक कह दिया था कि या तो तबादला निरस्त हो, अन्यथा वे अपने बच्चों की टीसी (Transfer Certificate) कटवाकर स्कूल ही बंद कर देंगे।

🤝 अफसरों के सामने रोने लगीं लाड़लियां; डेपुटेशन के आश्वासन से लौटी मुस्कान

घटना की संवेदनशीलता और हाईवे तक गूंजते हंगामे की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग की टीम मौके पर दौड़ी। सहायक मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (ACBEO) बाबूलाल जब अपनी टीम के साथ समझाइश करने पहुंचे, तो छात्राएं अपनी कॉपियां और किताबें लेकर रोते हुए उनके सामने खड़ी हो गईं। बच्चियों का यह रोना देख वहां मौजूद अधिकारी भी भावुक हो गए।

अधिकारियों का त्वरित एक्शन: ग्रामीणों के तीखे तेवर और बच्चों के आंसुओं की गंभीरता को देखते हुए एसीबीईओ ने तुरंत जिला शिक्षा अधिकारी और उच्च मुख्यालय पर फोन घुमाया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत आदेश जारी किया कि प्रशासनिक कारणों से ट्रांसफर नहीं रुक सकता, लेकिन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए तीनों शिक्षकों को तुरंत इसी स्कूल में डेपुटेशन पर यथावत रखा जाता है।

🚪 खुल गया स्कूल का गेट, ‘हर-हर महादेव’ और ‘गुरुदेव’ के नारों से गूंजा परिसर

जैसे ही अधिकारियों ने लाउडस्पीकर पर तीनों शिक्षकों को डेपुटेशन पर वापस इसी स्कूल में तैनात रखने का लिखित भरोसा दिया, धरने पर बैठे बच्चों के मुरझाए चेहरों पर अचानक खिलखिलाती मुस्कान लौट आई। परिजनों ने तुरंत नारेबाजी बंद की और खुशी-खुशी स्कूल के मुख्य गेट का ताला खोल दिया। राजस्थान के ग्रामीण अंचल से आई यह तस्वीर बयां करती है कि आज भी सरकारी स्कूलों में अगर शिक्षक पूरी शिद्दत से पढ़ाएं, तो समाज उन्हें सिर-आंखों पर बिठाकर रखता है।

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