मध्यप्रदेश भाजपा में जल्द नई प्रदेश कार्यसमिति: महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी, नए चेहरों को मिल सकता है मौका

0
4

drnewsindia.com/भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में नई प्रदेश कार्यसमिति को लेकर संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में बनने जा रही नई कार्यसमिति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार इसकी घोषणा जल्द की जा सकती है। नई कार्यसमिति के गठन के बाद अगले महीने ऐतिहासिक नगरी ओरछा में पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक आयोजित करने की तैयारी भी शुरू हो गई है।

भाजपा संगठन इस बैठक को आगामी नगरीय निकाय चुनाव और वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव की दृष्टि से बेहद अहम मान रहा है। बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, चुनावी रणनीति तैयार करने और आगामी तीन महीने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

सीमित आकार की होगी नई कार्यसमिति

इस बार भाजपा संगठन कार्यसमिति का आकार सीमित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। पार्टी संविधान के अनुसार प्रदेश कार्यसमिति को करीब 105 सदस्यों तक सीमित रखने का निर्णय लिया गया है। वहीं विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी कुल संख्या के लगभग 30 प्रतिशत यानी करीब 32 सदस्य तक रखी जा सकती है।

इसे भाजपा संगठन में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ कार्यकालों में कार्यसमिति का आकार लगातार बढ़ता गया था। पूर्व अध्यक्षों के कार्यकाल में कार्यसमिति सदस्य, स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या 400 के पार पहुंच चुकी थी। पिछली कार्यसमिति में कुल 463 सदस्य शामिल थे।

संगठन का मानना है कि सीमित आकार होने से कार्यसमिति अधिक प्रभावी, सक्रिय और निर्णय लेने में सक्षम हो सकेगी।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर फोकस

नई कार्यसमिति के गठन में महिला प्रतिनिधित्व भाजपा की प्राथमिकताओं में शामिल है। सूत्रों के मुताबिक पिछली कार्यसमिति में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत थी, जिसे इस बार बढ़ाकर 25 से 30 प्रतिशत तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।

भाजपा महिला मोर्चा से जुड़ी सक्रिय कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और संगठनात्मक अनुभव रखने वाली महिला नेताओं को मौका देने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि नई कार्यसमिति में 30 से अधिक महिलाओं को जगह मिल सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के पीछे भाजपा की नजर शहरी महिला मतदाताओं और युवा महिला नेतृत्व को मजबूत करने पर भी है।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर

भाजपा इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर भी विशेष ध्यान दे रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने के संकेत हैं।

सूत्रों के मुताबिक संगठन ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहता है जो जमीनी स्तर पर सक्रिय हों और संगठनात्मक पकड़ रखते हों। लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं और जिला प्रभारियों को भी कार्यसमिति में स्थान मिल सकता है।

छोटे जिलों को मिल सकता है बड़ा प्रतिनिधित्व

कार्यसमिति का आकार छोटा होने की वजह से इस बार बड़े शहरों का प्रभाव कम हो सकता है। अब तक भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सागर और जबलपुर जैसे बड़े जिलों का दबदबा कार्यसमिति में अधिक दिखाई देता था, लेकिन इस बार छोटे जिलों और नए चेहरों को अवसर दिए जाने की तैयारी है।

हर तीन महीने में होगी बैठक

प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कार्यकाल की पहली कार्यसमिति बैठक ओरछा में प्रस्तावित है। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि अब कार्यसमिति की बैठकें नियमित रूप से हर तीन महीने में आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक बैठक में आगामी तीन महीने की रणनीति और संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा की जाएगी।

नई कार्यसमिति की प्रमुख बातें:

  • कार्यसमिति का आकार करीब 105 सदस्यों तक सीमित रहेगा
  • विशेष आमंत्रित सदस्य अधिकतम 32 तक हो सकते हैं
  • महिलाओं की हिस्सेदारी 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी
  • एससी, एसटी और ओबीसी नेताओं को प्राथमिकता
  • छोटे जिलों और नए चेहरों को मौका मिलने के संकेत
  • पहली कार्यसमिति बैठक ओरछा में प्रस्तावित
  • हर तीन महीने में नियमित बैठक आयोजित करने की योजना

भाजपा का यह नया संगठनात्मक मॉडल आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को ज्यादा सक्रिय, संतुलित और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here