मप्र में फिर गूंजा मंत्रिमंडल विस्तार का नाम—3 से 4 मंत्री बाहर, दो वरिष्ठ नेताओं को मिल सकता है मौका

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Drnewsindia.comभोपाल। मध्यप्रदेश में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही मोहन यादव कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा चल रही थी, लेकिन अब सरकार के दो वर्ष पूरे होने से पहले विभागवार समीक्षा के बाद तैयार हुआ रिपोर्ट कार्ड इस विस्तार का आधार बनने जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, 3 से 4 मंत्री कैबिनेट से बाहर हो सकते हैं, जबकि दो वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में एंट्री मिल सकती है।

केंद्रीय नेतृत्व भी तैयार कर रहा रिपोर्ट कार्ड

जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने भी अलग-अलग एजेंसियों से मंत्रियों के कामकाज पर रिपोर्ट तैयार करवाई है। माना जा रहा है कि कई मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है।
सूत्र बताते हैं कि “3-4 मंत्रियों को छोड़कर बाकी विभागों में कामकाज की रफ्तार बेहद धीमी है और कई जगह मंत्रियों की विभाग पर पकड़ कमजोर पाई गई है।” ऐसे में फेरबदल लगभग तय माना जा रहा है।

नए साल में होगा विस्तार

भाजपा संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार अब भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा के बाद ही होगा।
जेपी नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है। संभावना है कि इस तिथि के आसपास नया अध्यक्ष सामने आएगा।
इसके बाद मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सत्ता सूत्रों के अनुसार, विस्तार में 3–4 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7–8 नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है। इनमें कई वरिष्ठ विधायक भी शामिल हैं।

क्षेत्रीय और जातीय संतुलन भी रहेगा फोकस में

दो साल पूरे होने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव सभी विभागों की समीक्षा कर चुके हैं। भोपाल और खजुराहो में हुई बैठकों में विभागों की प्रगति, जनकल्याणकारी योजनाओं के असर और कामकाज की गुणवत्ता पर आंकड़े जुटाए गए हैं।
इन्हीं समीक्षाओं के आधार पर मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को संतुलित करते हुए फेरबदल किए जाएंगे।

एक दर्जन नेता चर्चा में

सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने इस विषय पर प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं से पहली दौर की चर्चा पूरी कर ली है।
करीब एक दर्जन नेताओं के नामों पर विचार किया जा रहा है।
वर्तमान में मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 31 मंत्री हैं—20 कैबिनेट, 6 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 4 राज्य मंत्री।
विधानसभा संख्या के हिसाब से चार और विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है।

पहली बार विधायक बने मंत्रियों पर भी निर्णय संभव

कैबिनेट में शामिल चार ऐसे मंत्री हैं, जो पहली बार विधायक बने हैं। विस्तार में इनके भविष्य को लेकर भी संगठन कोई बड़ा निर्णय ले सकता है।
सूत्रों का मानना है कि सीनियर नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है, क्योंकि आने वाले तीन वर्ष चुनाव की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

वरिष्ठ नेताओं की कतार लंबी

विस्तार की चर्चा के बीच कई वरिष्ठ विधायक भी कतार में हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि “मप्र में जितने दिग्गज मंत्रिमंडल में हैं, उतने ही बाहर भी इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट कार्ड के आधार पर यह सही समय है जब सरकार अपने कुनबे को मजबूत कर सकती है और जरूरी फेरबदल भी कर सकती है।”

सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों का अंतिम रिपोर्ट कार्ड केंद्रीय नेतृत्व को सौंपा जाएगा और उसके बाद ही कैबिनेट विस्तार की आधिकारिक घोषणा संभव है।


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