रायसेन: ‘मेरा युवा भारत’ के प्रशिक्षण में युवाओं ने सीखी उपार्जन और वेयरहाउसिंग की बारीकियां

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रायसेन: युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (भारत सरकार) के ‘मेरा युवा भारत’ केंद्र द्वारा आयोजित 5-दिवसीय प्रायोगिक शिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन गुरुवार को युवाओं को खाद्य सुरक्षा चक्र और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की जमीनी कार्यप्रणाली से रूबरू कराया गया। यह विशेष सत्र मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन और उपार्जन केंद्र साँचेत में संपन्न हुआ।

खेत से गोदाम तक: ऐसे पहुँचता है किसान का अनाज

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यह समझने का मौका मिला कि किस प्रकार किसानों की उपज सरकारी तंत्र का हिस्सा बनती है। उपार्जन केंद्र प्रभारी संतोष बघेल और आदित्य लोधी ने खरीदी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी दी:

  1. पंजीकरण व आवंटन: किसान के आने पर सबसे पहले उसे ट्रॉली नंबर आवंटित किया जाता है।
  2. गुणवत्ता जांच: अनाज की शुद्धता और नमी (Moisture) की कड़ाई से जांच की जाती है ताकि केवल उच्च गुणवत्ता वाला स्टॉक ही लिया जाए।
  3. तौल और पावती: पारदर्शिता के साथ अनाज का वजन किया जाता है और किसानों को आधिकारिक पावती (Receipt) जारी की जाती है।

वैज्ञानिक तरीके से भंडारण और WHR का महत्व

उपार्जन के बाद अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक पद्धतियों के बारे में भी विस्तार से बताया गया। युवाओं को WHR (वेयरहाउस रसीद) की प्रक्रिया समझाई गई, जो न केवल अनाज की सुरक्षा सुनिश्चित करती है बल्कि बैंकिंग लेनदेन और वित्तीय प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


सरकारी कार्यप्रणाली को समझने का अवसर

‘माय भारत’ की डिप्टी डायरेक्टर मोनिका चौधरी ने बताया कि इस 5-दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सरकारी विभागों की कार्यशैली और खाद्य सुरक्षा के जटिल चक्र से अवगत कराना है।

सक्रिय भागीदारी: इस तकनीकी सत्र में कीर्ति, पायल बैरागी, चंचल चौहान, अमित पंथी और अनुराग ठाकुर जैसे युवाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और उपार्जन व गोदाम प्रबंधन की बारीकियों पर विशेषज्ञों से सवाल पूछे।

यह प्रशिक्षण युवाओं को भविष्य में प्रशासनिक और लॉजिस्टिक क्षेत्र को समझने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

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