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भोपाल: खरीफ फसल की बुवाई का समय नजदीक आते ही देश और मध्य प्रदेश में खाद की किल्लत को लेकर किसानों का गुस्सा भड़कने लगा है। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं कार्यकारी अध्यक्ष प्रहलाद दास बैरागी ने एक प्रेस नोट जारी कर केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को डीएपी (DAP) खाद उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
खाद का स्टॉक खत्म, PIB के दावे फेल
श्री बैरागी ने गहरा अफसोस जताते हुए कहा कि वर्तमान में देश के भीतर खरीफ सीजन की जरूरत को पूरा करने के लिए खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद नहीं है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर खाद की उपलब्धता नगण्य है।
“जब देश का किसान खेतों में फसल पैदा करने के लिए खाद खरीदने जाता है, तो उसे खाद के बदले पुलिस की लाठियां मिलती हैं। और जब वह अपनी मेहनत की उपज का सही दाम मांगता है, तो उसे गोलियां दी जाती हैं।” — प्रहलाद दास बैरागी, कार्यकारी अध्यक्ष (अखिल भारतीय किसान सभा)

गलत विदेश नीति और ‘ट्रम्प रणनीति’ का आरोप
किसान नेता ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में अमेरिका के साथ जो समझौते किए गए, उसके तहत भारतीय किसानों को लूटने और कृषि व्यवस्था को बर्बाद करने की एक सोची-समझी ‘ट्रम्प रणनीति’ के तहत काम किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि आज देश भर के किसानों में भारी आक्रोश है।
खाद की आसमान छूती कीमतें:
- DAP खाद: सरकारी कीमत ₹1350 प्रति बोरी है, लेकिन बाजारों से यह पूरी तरह गायब (नगण्य) है।
- NPK खाद: इसकी कीमत ₹2450 प्रति बोरी तक पहुंच चुकी है, जो आम किसान की पहुंच से बाहर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जैविक खेती के सुझाव पर पलटवार करते हुए बैरागी ने कहा, “एक तरफ पीएम कहते हैं कि ईरान, अमेरिका और इजराइल युद्ध के कारण खाद का आयात नहीं हो पा रहा है, इसलिए किसान जैविक खाद का उपयोग करें। दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।”

कृषि मंत्री के गृह क्षेत्र में ‘जैविक हाट बाजार’ पर ताला
प्रेस नोट में वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी घेरा गया। श्री बैरागी ने बताया कि कृषि मंत्री के संसदीय क्षेत्र रायसेन में बना ‘जैविक हाट बाजार’ प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते बंद पड़ा हुआ है। सरकार की लापरवाही के कारण इस पर ताले लटके हैं, जो इनके दावों की पोल खोलता है।
अखिल भारतीय किसान सभा की प्रमुख मांगें:
किसान सभा ने वर्तमान खरीफ फसल के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को नाकाफी बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है और सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- C2+50% फॉर्मूला लागू हो: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार कृषि उपज की लागत का डेढ़ गुना (C2+50%) भाव निर्धारित करने का वादा पूरा किया जाए।
- कर्ज माफी: प्राकृतिक आपदाओं और लगातार होते नुकसान को देखते हुए किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए।
- कर मुक्त डीजल: कृषि कार्य के लिए किसानों को ₹35 प्रति लीटर की दर से कर-मुक्त डीजल उपलब्ध कराया जाए।

उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रेस नोट के अंत में प्रहलाद दास बैरागी ने मध्य प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो प्रदेश के किसानों का आक्रोश उग्र रूप धारण कर लेगा। आने वाले समय में यह एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, जो लोकतंत्र में सरकारों के लिए बहुत बड़ी चिंता और चुनौती का कारण बनेगा।
– मुख्य संवाददाता, drnewsindia.com




