drnewsindia.com / विशाखापट्टनम: भारत के समुद्री खाद्य (Seafood) निर्यात को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र को देश भर में मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए आज से विशाखापट्टनम में दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला’ (National Workshop on Seafood Exports) की शुरुआत हो रही है।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग द्वारा, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सहयोग और आंध्र प्रदेश सरकार के समर्थन से किया जा रहा है।
दिग्गज नेता और उद्योग जगत की हस्तियां लेंगी हिस्सा
इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ निर्यातक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, स्टार्टअप्स और MSMEs हिस्सा लेंगे।
उद्घाटन सत्र में निम्नलिखित मुख्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है:
- नारा चंद्रबाबू नायडू (मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश)
- पीयूष गोयल (केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री)
- राजीव रंजन सिंह (केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री)
- किंजरपुल राममोहन नायडू (केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री)
- चिराग पासवान (केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री)

इन मुख्य बिंदुओं पर रहेगा फोकस
इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। कार्यक्रम के दौरान इन प्रमुख विषयों पर रणनीति बनाई जाएगी:
- बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन): निर्यात की गुणवत्ता सुधारने पर जोर।
- सर्टिफिकेशन और ट्रेसेबिलिटी: वैश्विक मानकों के अनुरूप सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को मजबूत करना।
- नीतिगत सहायता: छोटे और बड़े निर्यातकों के लिए अनुकूल नीतियां तैयार करना।
- स्टार्टअप्स की भागीदारी: निर्यात क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों (MSMEs) की हिस्सेदारी बढ़ाना।
लक्ष्य ₹1 लाख करोड़ का: इस कार्यशाला के जरिए देश के समुद्री खाद्य निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य तक पहुंचाने और वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति को और मजबूत करने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा।





