drnewsindia.com / नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद’ (PM-EAC) के सदस्यों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में वैश्विक मंदी और उथल-पुथल के इस दौर में भी भारत की आर्थिक विकास दर (Economic Growth) को और तेज गति देने के लिए विभिन्न उपायों और रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान देश के आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने (Ease of Living) और व्यापार जगत के लिए नियमों को सरल करने (Ease of Doing Business) को लेकर भी कई बड़े सुधारों पर मंथन हुआ।
पश्चिम एशिया संकट (West Asia Conflict) के असर पर गंभीर चर्चा
बैठक का एक मुख्य केंद्र बिंदु दुनिया में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव रहे। आर्थिक सलाहकार परिषद के शीर्ष विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने प्रधानमंत्री के सामने पश्चिम एशिया संकट (मिस्र, इजरायल और आसपास के क्षेत्रों का तनाव) का भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का एक विस्तृत आकलन पेश किया।
विशेषज्ञों ने इस बात पर रणनीतिक सुझाव दिए कि कैसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आ रही बाधाओं और कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखा जा सकता है।

इन प्रमुख बिंदुओं पर रहा विशेष फोकस:
- आर्थिक विकास को रफ्तार: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ को लगातार बनाए रखने के लिए नए नीतिगत उपायों पर चर्चा।
- Ease of Living (जीवन की सुगमता): आम जनता से जुड़े नियमों को और सरल बनाना, ताकि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ बिना किसी परेशानी के सीधे लोगों तक पहुंचे।
- Ease of Doing Business (व्यापार में आसानी): देश में निवेश को बढ़ावा देने और छोटे-बड़े उद्योगों को लाइसेंस व कागजी कार्यवाहियों से राहत देने के लिए जरूरी सुधारों का खाका।
- वैश्विक मंदी से सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आ रहे आर्थिक झटकों से घरेलू बाजार, रोजगार और महंगाई को सुरक्षित रखने के लिए अग्रिम रणनीतियां।
पीएम मोदी ने दिए जरूरी निर्देश
बैठक का मुख्य संदेश:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिषद के सदस्यों के विचारों और सुझावों को बेहद ध्यान से सुना। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने स्पष्ट किया कि भारत आज दुनिया में एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, और वैश्विक संकटों के बीच भी देश की विकास यात्रा रुकनी नहीं चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और सलाहकारों को ऐसे नीतिगत सुधार लागू करने को कहा जिससे धरातल पर आम लोगों और उद्यमियों को सीधा फायदा महसूस हो।
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