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भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत और फिजूलखर्ची रोकने की अपील के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक सराहनीय कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में एक नई कार्य संस्कृति की शुरुआत करते हुए अपने काफिले (कारकेड) को छोटा करने का निर्णय लिया है।
फिजूलखर्ची और जनता की परेशानी होगी कम
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब उनके कारकेड में सुरक्षा के लिहाज से केवल न्यूनतम आवश्यक वाहन ही शामिल होंगे।
- नो रैली, नो काफिला: सीएम ने स्पष्ट किया है कि उनके दौरों के दौरान किसी भी प्रकार की वाहन रैली या अनावश्यक वाहनों का लंबा काफिला नहीं रहेगा।
- उद्देश्य: इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की बचत करना और सड़क पर आम जनता को लगने वाले जाम से निजात दिलाना है।

कैसी थी पुरानी व्यवस्था?
अब तक मुख्यमंत्री की सुरक्षा और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के तहत उनके काफिले में भारी-भरकम गाड़ियों का दस्ता चलता था।
- वाहनों की संख्या: पहले काफिले में कुल 13 वाहन शामिल रहते थे।
- काफिले का स्वरूप: इसमें वार्नर, पायलट वाहन, मीडिया कार, सुरक्षा एस्कोर्ट (E-3 वाहन), काउंटर असॉल्ट टीम (CAT) और अन्य प्रशासनिक गाड़ियां तैनात रहती थीं।
लंबे काफिले के कारण न केवल ईंधन की खपत अधिक होती थी, बल्कि सुरक्षा कारणों से सड़कों को ब्लॉक किए जाने पर जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

कार्य संस्कृति में बदलाव का संदेश
डॉ. मोहन यादव के इस फैसले को ‘सिम्पल लिविंग और हाई थिंकिंग’ के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के ई-स्कूटी से दफ्तर पहुंचने के बाद अब मुख्यमंत्री के इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि सरकार पर्यावरण और संसाधन संरक्षण को लेकर गंभीर है।
“प्रधानमंत्री की अपील को ध्यान में रखते हुए हमें अनावश्यक संसाधनों के उपयोग से बचना होगा। जनता की सेवा ही प्राथमिकता है, दिखावा नहीं।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
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