सीहोर में रेत माफिया पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: रफीगंज-लोदड़ी में अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को घेरा, कैमरे पर खुली पोल!

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भैरुंदा (सीहोर)। जिले के भैरुंदा क्षेत्र में रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही मासूमों की जान की परवाह। शासन के नियमों को ठेंगा दिखाकर सरकारी राजस्व को खुलेआम चपत लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है।

गुरुवार को ग्राम रफीगंज-लोदड़ी में ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने गांव के भीतर से बिना रॉयल्टी और बिना नंबर प्लेट के गुजर रहे तेज रफ्तार रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को रोककर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी।

🚫 “गांव का रास्ता सीधा पड़ता है…” — कैमरे पर चालक ने कबूला सच

ग्रामीणों द्वारा घेरे गए ट्रैक्टरों में से एक चालक वीर ने कैमरे के सामने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  • न रॉयल्टी, न लाइसेंस: चालक ने ऑन-कैमरा स्वीकार किया कि उसके पास रेत परिवहन की कोई वैध रॉयल्टी (Royalty) नहीं है और न ही उसके पास खुद का ड्राइविंग लाइसेंस है।
  • मालिक का दबाव: चालक का कहना था कि गांव का रास्ता छोटा और सीधा पड़ता है, इसलिए ट्रैक्टर मालिक ने उन्हें मुख्य मार्ग छोड़कर इसी ग्रामीण रास्ते से निकलने का सख्त निर्देश दिया है।

मौके पर मौजूद ट्रैक्टरों को देखने से साफ पता चलता है कि कार्रवाई के डर से माफियाओं ने अब मुख्य मार्गों को छोड़कर ग्रामीण रास्तों को अपना ‘सेफ जोन’ बना लिया है। अधिकांश गाड़ियों पर नंबर प्लेट तक गायब हैं।

🏬 दुकान में जा घुसा था ट्रैक्टर, हादसे के बाद सतर्क हुए ग्रामीण

ग्रामीण बब्लू और गांव के चौकीदार ने बताया कि उन्होंने कई बार ट्रैक्टर चालकों को गांव के भीतर से न गुजरने की हिदायत दी, लेकिन रसूख के दम पर वे नहीं माने। ग्रामीणों का यह गुस्सा हाल ही में लोदड़ी गांव में हुए एक भीषण हादसे के बाद फूटा है।

बाल-बाल बची मासूम: कुछ दिन पहले ही रेत से भरी एक तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे स्थित एक दुकान में जा घुसी थी। गनीमत रही कि घटना के समय दुकान में मौजूद एक छोटी बच्ची को ग्रामीणों ने सूझबूझ से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इससे पहले भी कई बच्चे इन वाहनों की चपेट में आने से बाल-बाल बचे हैं।

❓ माइनिंग और परिवहन विभाग के दावों पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने खनिज (Mining) विभाग, परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  1. बिना नंबर गाड़ियां कैसे वैध? ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि आखिर बिना नंबर प्लेट, बिना फिटनेस और बिना वैध दस्तावेजों के ये भारी-भरकम वाहन मुख्य सड़कों से होते हुए ग्रामीण अंचलों तक कैसे दौड़ रहे हैं?
  2. नाबालिगों के हाथ में स्टेयरिंग: अप्रशिक्षित और नाबालिग चालक इन ट्रैक्टरों को अंधाधुंध रफ्तार में दौड़ाते हैं, जिससे ग्रामीण रास्तों पर चलना दूभर हो गया है।

📞 100 नंबर पर दी सूचना, पूर्ण प्रतिबंध की मांग

परेशान ग्रामीणों ने मामले की लिखित व मौखिक सूचना तुरंत 100 नंबर पर कॉल करके पुलिस को दी है। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि गांव के भीतर से व्यावसायिक रेत का परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए। यदि रेत का कारोबार करना ही है, तो वैध रॉयल्टी पर्ची कटवाकर केवल मुख्य (शासकीय) मार्ग का उपयोग किया जाना चाहिए।

अब देखना यह होगा कि इस खुली चुनौती के बाद सीहोर जिला प्रशासन और माइनिंग विभाग इन रेत माफियाओं पर क्या कड़ी कार्रवाई करता है।

📌 रफीगंज-लोदड़ी रेत विवाद: एक नजर में (Quick Takeaways)

मुख्य बिंदुजमीनी हकीकत और मांगें
प्रभावित क्षेत्रग्राम रफीगंज और लोदड़ी, तहसील भैरुंदा, जिला सीहोर
ग्रामीणों का आरोपबिना रॉयल्टी, बिना नंबर और बिना लाइसेंस के दौड़ रहे रेत के वाहन
बड़ा खुलासापकड़े गए चालक ने कैमरे पर स्वीकारी बिना लाइसेंस व बिना रॉयल्टी की बात
ग्रामीणों की मांगगांव की संकरी सड़कों से भारी वाहनों का प्रवेश 100% बंद हो
प्रशासनिक एक्शनपुलिस को 100 नंबर पर दी गई सूचना, कार्रवाई का इंतजार

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