सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: देश भर के ‘इन-सर्विस’ शिक्षकों को अब देनी ही होगी TET परीक्षा, समय-सीमा बढ़ी

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drnewsindai.com

भोपाल-दिल्ली \ मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे लाखों शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सभी ‘इन-सर्विस’ (सेवा में कार्यरत) शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा।

अदालत ने शुक्रवार को इस मामले से जुड़ी सभी रिव्यू पिटीशन (समीक्षा याचिकाएं) खारिज कर दी हैं। हालांकि, कोर्ट ने शिक्षकों को एक बड़ी राहत देते हुए परीक्षा पास करने की समय-सीमा को बढ़ा दिया है।

⚡ मुख्य बिंदु: फैसले की 4 बड़ी बातें

  • 3 साल की मोहलत: परीक्षा पास करने की समय-सीमा 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है।
  • अंतिम तारीख: अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET परीक्षा पास करने का आखिरी मौका मिलेगा।
  • पूरे देश में लागू: यह फैसला सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के उन सभी राज्यों पर लागू होगा जहां पुराने शिक्षकों को छूट मिली हुई थी।
  • साल में 2 बार परीक्षा: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर देने के लिए साल में कम से कम दो बार TET परीक्षा आयोजित की जाए।

🏛️ “बच्चों का हित सर्वोपरि, कानून में व्यावहारिक राहत दी” — सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए बेहद सख्त और स्पष्ट टिप्पणी की। कोर्ट ने माना कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा प्रभावित होने से व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, लेकिन बच्चों का भविष्य और उनका हित सबसे ऊपर है।

“TET सिर्फ नौकरी पाने की कोई मामूली शर्त नहीं है, बल्कि यह बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की एक संवैधानिक आवश्यकता है।” — सुप्रीम कोर्ट

पहले कोर्ट ने इसके लिए 2 साल का समय (1 सितंबर 2025 के आदेश के अनुसार) दिया था, लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, इसलिए व्यावहारिक रुख अपनाते हुए इसे बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इसके बाद आगे कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

📊 असर: एमपी के 1.5 लाख से ज्यादा शिक्षकों पर प्रभाव

मध्य प्रदेश में इस फैसले का सीधा असर डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों पर पड़ने वाला है, जो बिना TET पास किए लंबे समय से पढ़ा रहे हैं। अब उन्हें 2028 तक हर हाल में यह परीक्षा क्लियर करनी होगी, अन्यथा उनकी सेवाओं पर संकट आ सकता है।

😡 शिक्षक संगठनों में भारी नाराजगी, आगे की लड़ाई की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षक संगठनों में हड़कंप मच गया है और उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है:

  • ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन: प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगोर ने कहा कि संगठन इस आदेश की कानूनी समीक्षा कर रहा है। पुराने शिक्षकों पर इस तरह TET थोपना उनके सेवा अधिकारों के साथ सरासर अन्याय है।
  • अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा: मोर्चे ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने एलान किया है कि वे इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई जारी रखेंगे। मोर्चा अब आरटीई एक्ट (RTE Act) में संशोधन की मांग उठाएगा और कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर करने की तैयारी कर रहा है।

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