अगले तीन साल में 6 चुनाव, मोहन यादव सरकार के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा
Drnewsindia/भोपाल। मध्य प्रदेश में साल 2026 की शुरुआत के साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पूरी तरह मिशन इलेक्शन मोड में आ जाएगी। अगले तीन वर्षों में प्रदेश में सहकारिता, मंडी, जल उपभोक्ता समिति, नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा समेत कुल छह बड़े चुनाव होने हैं। इसे देखते हुए शासन और प्रशासन ने अभी से चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।
सरकार के सामने जहां समय पर चुनाव कराना बड़ी चुनौती होगी, वहीं भाजपा संगठन के साथ समन्वय बनाकर राजनीतिक मजबूती बनाए रखना भी मुख्यमंत्री के लिए अहम परीक्षा साबित होगा।
2026 में सहकारिता, मंडी और जल उपभोक्ता समिति चुनाव
वर्ष 2026 में प्रदेश में सहकारी समितियों, कृषि उपज मंडियों और जल उपभोक्ता समितियों के चुनाव कराए जाने की तैयारी है। सरकार ने 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस दौरान किसानों से जुड़ी योजनाओं और संस्थाओं पर विशेष फोकस रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभागीय समीक्षा बैठकों में मंत्रियों और अधिकारियों को इन चुनावों की तैयारी समय पर पूरी करने के निर्देश दे चुके हैं।
12 साल से लंबित हैं सहकारिता और मंडी चुनाव
प्रदेश में सहकारी समितियों और मंडी समितियों के चुनाव पिछले 12 वर्षों से लंबित हैं।
- वर्ष 2013 में 4,523 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के चुनाव हुए थे।
- नियमानुसार 2018 में चुनाव होने थे, लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनावों के कारण टलते गए।
इस दौरान कई बार हाईकोर्ट के निर्देश भी मिले, लेकिन समितियों के पुनर्गठन और अधिनियम में संशोधन के चलते चुनाव नहीं हो सके। इसका असर यह हुआ कि अधिकांश समितियां प्रशासकों के भरोसे चल रही हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया और कार्यक्षमता प्रभावित हुई है।
चुनाव कराने की मांग तेज
भारतीय किसान संघ सहित कई किसान संगठन लंबे समय से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। सहकारी चुनाव गैर-दलीय होने के बावजूद इनमें राजनीतिक प्रभाव बना रहता है और कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक स्तर पर अवसर मिलता है। सरकार का दावा है कि समितियों का पुनर्गठन कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
2027 में निकाय और पंचायत चुनाव, परिसीमन अहम मुद्दा
वर्ष 2027 में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं।
- नगर निगम मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता द्वारा कराया जाएगा।
- सरकार ने नगर पालिका अधिनियम में संशोधन कर पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी है।
इसके साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य परिसीमन आयोग गठन का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो नगरीय निकाय और पंचायतों के आरक्षण, वार्ड परिसीमन और पुनर्गठन का जिम्मा इसी आयोग के पास होगा।
विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से
प्रदेश में 2028 के अंत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, लेकिन तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं।
- चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कराया जा रहा है।
- वित्त विभाग अगले तीन वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रोलिंग बजट तैयार कर रहा है।
सरकार चुनावी वर्ष से पहले विकास कार्यों पर विशेष जोर देने की रणनीति बना रही है ताकि किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक विवाद न खड़ा हो।




