भाजपा-संघ की आड़ में कांग्रेस नेतृत्व को दिग्विजय सिंह का आईना

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वरिष्ठों की उपेक्षा और संगठनात्मक कमजोरी पर बड़ा राजनीतिक संकेत

Drnewsindia/भोपाल।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के हालिया बयान को महज संयोग नहीं, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक गहरे राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा और आरएसएस के संगठनात्मक मॉडल की प्रशंसा कर दिग्विजय सिंह ने परोक्ष रूप से कांग्रेस के भीतर कैडर आधारित ढांचे की कमी और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संगठन शक्ति पर सीधा कटाक्ष

भाजपा और आरएसएस मॉडल में जमीनी कैडर, अनुशासन और मजबूत संगठनात्मक संरचना को सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। दिग्विजय सिंह द्वारा इसी संगठन शक्ति की सराहना को कांग्रेस में कैडर-बेस्ड सिस्टम के अभाव पर सीधा कटाक्ष माना जा रहा है।
राजनीति के मंझे खिलाड़ी दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस संगठन में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका सीमित होती जा रही है।

भाजपा-आरएसएस के सबसे बड़े आलोचक की अप्रत्याशित तारीफ

यह सर्वविदित है कि दिग्विजय सिंह भाजपा और संघ के सबसे मुखर आलोचकों में रहे हैं। ऐसे में अनुशासन और कार्यकर्ताओं के महत्व के आधार पर संघ-भाजपा की संगठनात्मक ताकत की प्रशंसा के गहरे राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।
कांग्रेस के भीतर कई नेता इस बयान से असहज हैं और यह बताने में जुट गए हैं कि दिग्विजय सिंह के बयानों से पूर्व में पार्टी को किस तरह नुकसान हुआ है।

कांग्रेस में बढ़ती बेचैनी

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा और संगठनात्मक कमजोरियों को लेकर एक बार फिर असंतोष खुलकर सामने आ सकता है।
खास बात यह है कि यह आवाज मध्य प्रदेश से उठी है, जहां कांग्रेस सीधे तौर पर भाजपा से मुकाबले में है।

वरिष्ठ नेता हाशिए पर

पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस में हुए पीढ़ीगत बदलाव के बाद वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी लगातार बढ़ी है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह जैसे नेता अपने-अपने क्षेत्रों तक सीमित होते नजर आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ भी सक्रिय राजनीति में कम दिखाई दे रहे हैं।
संगठन सृजन अभियान के तहत जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर भी प्रदेशभर में विरोध के स्वर सुनाई दिए।

भाजपा को भा गए ‘दिग्गी राजा’

दिग्विजय सिंह के बयान पर भाजपा नेताओं ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “हमारा संगठन प्रशंसा के लायक है। आइए, भाजपा में स्वागत है।”
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संघ को आदर्श संगठन बताते हुए कहा कि जो सही है, वही दिग्विजय सिंह की जुबान पर आ गया।
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तो दिग्विजय सिंह की तुलना सरदार पटेल से करते हुए कहा कि सच कहने का साहस हर किसी में नहीं होता।

कांग्रेस नेतृत्व की असहमति

दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने असहमति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिनके संदर्भ में संगठन शक्ति की बात की जा रही है, वे षड्यंत्र, घृणा, धनबल और वोट चोरी के सहारे सत्ता में आए हैं।

दिग्विजय की चुप्पी

भाजपा में शामिल होने के ऑफर पर दिग्विजय सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अरे छोड़िए, मुझे कुछ नहीं कहना है।”
हालांकि, उनकी चुप्पी के बावजूद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में यह बयान लंबे समय तक गूंजता रहेगा।

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