Drnewsindia/भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए जिंसी स्लॉटर हाउस कांड ने प्रशासन और सियासत दोनों को हिला कर रख दिया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ठीक सामने 26 टन मांस से भरा कंटेनर पकड़े जाने के बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। लैब रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि होने के बाद यह प्रकरण अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
PHQ के सामने पकड़ी गई खेप
यह मामला तब सामने आया जब हिंदूवादी संगठनों ने PHQ के सामने एक कंटेनर को रोका। यूपी नंबर के इस कंटेनर में एसी वैन के भीतर भारी मात्रा में मांस भरा हुआ था। पैकेटों पर QR कोड और अन्य जानकारियां दर्ज थीं। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और कंटेनर को जब्त कर लिया गया। कुल 26 टन मांस बरामद किया गया।
लैब रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि
जब्त मांस को जांच के लिए लैब भेजा गया, जहां रिपोर्ट में कुछ हिस्सों में बीफ (गोमांस) की पुष्टि हुई। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जिंसी स्लॉटर हाउस से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी।
असलम चमड़ा जेल भेजा गया
इस मामले में मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आरोप है कि उसी के माध्यम से यह मांस सप्लाई किया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह खेप कहां से आई और कहां भेजी जा रही थी।
डॉक्टर समेत 9 अधिकारी सस्पेंड
जांच में लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। एक सरकारी डॉक्टर समेत 9 अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इन पर स्लॉटर हाउस की निगरानी में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का आरोप है।
राजनीति में मचा भूचाल
यह मामला अब प्रशासन से निकलकर राजनीति के अखाड़े में पहुंच गया है। चूंकि राज्य सरकार से लेकर नगर निगम तक भाजपा का ही शासन है, इसलिए विपक्ष ने सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। नगर निगम के इस स्लॉटर हाउस को “लाइवस्टॉक” नाम की फर्म को सालाना 4 लाख रुपये के किराए पर दिया गया था, जिसकी भूमिका भी अब जांच के घेरे में है।
भाजपा पार्षद और निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बयान देते हुए कहा,
“चाहे असलम चमड़ा हो या कोई और, अगर कोई इस तरह के अपराध में शामिल है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
कई सवाल खड़े करता है मामला
PHQ जैसे संवेदनशील इलाके के सामने इतनी बड़ी मात्रा में मांस का पकड़ा जाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर इतनी बड़ी खेप कैसे बिना रोक-टोक शहर में घुस आई? कौन-कौन लोग इस नेटवर्क में शामिल हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है?




