राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन का उद्घाटन

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दी बोले– “अध्यक्ष की भूमिका लोकतंत्र की आत्मा है”

Drnewsindia.com/नई दिल्ली | संसद भवन परिसर

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्ष की भूमिका अद्वितीय होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अध्यक्ष को अक्सर कम बोलने का अवसर मिलता है, लेकिन उनकी असली जिम्मेदारी दूसरों की बात ध्यान से सुनने और यह सुनिश्चित करने में होती है कि सभी को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले। उन्होंने कहा कि धैर्य अध्यक्षों का सबसे बड़ा गुण है, जो शोर करने वाले और अति उत्साही सांसदों को भी मुस्कान के साथ संभाल लेते हैं।

संविधान सदन: भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी

प्रधानमंत्री मोदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जिस स्थान पर यह सम्मेलन हो रहा है, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का ऐतिहासिक केंद्र है। औपनिवेशिक शासन के अंतिम वर्षों में इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा ने भारत के संविधान का मसौदा तैयार किया था।

उन्होंने बताया कि आज़ादी के बाद 75 वर्षों तक यही भवन भारत की संसद रहा, जहां देश के भविष्य से जुड़े ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। अब इस इमारत को “संविधान सदन” नाम देकर लोकतंत्र को समर्पित किया गया है। हाल ही में भारत ने अपने संविधान के लागू होने के 75 वर्ष पूरे किए हैं, और ऐसे समय में यहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी लोकतंत्र के लिए विशेष महत्व रखती है।

विविधता बनी भारत की लोकतांत्रिक ताकत

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत आज़ाद हुआ था, तब यह आशंका जताई जाती थी कि इतनी विविधता वाला देश लोकतंत्र नहीं संभाल पाएगा। लेकिन भारत ने इसी विविधता को अपनी ताकत बना लिया।

उन्होंने कहा, “भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएं लोकतंत्र को स्थायित्व, गति और व्यापकता देती हैं।”
उन्होंने भारत की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा—

  • भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है।
  • UPI दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली है।
  • भारत सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है।
  • स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत तीसरे स्थान पर है।
  • एविएशन, मेट्रो और रेलवे नेटवर्क में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में है।
  • दूध उत्पादन में भारत पहले और चावल उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।

“भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम व्यक्ति तक पहुंच”

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना।”
उन्होंने बताया कि जनकल्याण की भावना से काम करते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के हर व्यक्ति तक पहुंचे। इसी का परिणाम है कि हाल के वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।

जनता सर्वोपरि, टेक्नोलॉजी लोकतंत्र की साथी

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लोकतंत्र इसलिए सफल है क्योंकि यहां जनता सर्वोपरि है। जनता की आकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए प्रक्रिया से लेकर तकनीक तक हर चीज का लोकतंत्रीकरण किया गया है।

कोविड-19 काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देश में संकट होने के बावजूद भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाएं और टीके उपलब्ध कराए। यह भारत के लोकतांत्रिक संस्कारों का प्रमाण है।

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास

प्रधानमंत्री ने 2024 के आम चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था।

  • करीब 98 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे।
  • 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से ज्यादा राजनीतिक दल मैदान में थे।
  • महिला मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी रही।

उन्होंने कहा कि आज भारत में महिलाएं सिर्फ मतदान ही नहीं कर रहीं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। राष्ट्रपति, दिल्ली की मुख्यमंत्री सहित लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधि हैं।

भारत: लोकतंत्र की जननी

प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र की तुलना गहरी जड़ों वाले विशाल वृक्ष से की। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में हजारों वर्षों से सभा, संवाद और सहमति के आधार पर निर्णय लेने की परंपरा रही है। वेदों, बौद्ध संघों और प्राचीन ग्राम सभाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों के उदाहरण मिलते हैं।

राष्ट्रमंडल और ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रमंडल की कुल आबादी का करीब 50 प्रतिशत भारत में रहता है। भारत स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत हर वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की आवाज़ मजबूती से उठाता है। G20 की अध्यक्षता के दौरान भी ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा गया। भारत ओपन-सोर्स तकनीकी प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रहा है ताकि विकासशील देश भारत जैसी व्यवस्थाएं बना सकें।

संसद को जनता से जोड़ने की पहल

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय संसद स्टडी टूर, प्रशिक्षण कार्यक्रम और इंटर्नशिप के जरिए लोगों को संसद से जोड़ रही है।
उन्होंने कहा कि अब संसद में AI की मदद से बहसों और कार्यवाही का क्षेत्रीय भाषाओं में रियल टाइम अनुवाद किया जा रहा है, जिससे युवा पीढ़ी को संसद को समझने में मदद मिल रही है।

सीखने–साझा करने की परंपरा

प्रधानमंत्री ने बताया कि वे राष्ट्रमंडल से जुड़े 20 से अधिक देशों में जा चुके हैं और कई संसदों को संबोधित कर चुके हैं। वहां से मिली अच्छी परंपराओं को वे भारत की संसद के नेतृत्व के साथ साझा करते रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन सीखने और साझा करने की प्रक्रिया को और मजबूत करेगा।

प्रमुख अतिथि

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश, अंतर संसदीय संघ की अध्यक्ष डॉ. तुलिया एकसन, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफर कलीला सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


पृष्ठभूमि

28वीं CSPOC की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला कर रहे हैं। इसमें 42 राष्ट्रमंडल देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन में इन विषयों पर चर्चा होगी—

  • मजबूत लोकतांत्रिक संस्थानों में अध्यक्षों की भूमिका
  • संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग
  • सांसदों पर सोशल मीडिया का प्रभाव
  • संसद को जनता के और करीब लाने की रणनीतियां
  • मतदान से आगे नागरिक भागीदारी के नए तरीके

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