सिंधिया गुट के दबाव में मिली राहत

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ग्वालियर व्यापार मेले में वाहनों पर 50% रोड टैक्स छूट को मंजूरी

Drnewsindia.com/भोपाल/ग्वालियर।
ग्वालियर में चल रहे ऐतिहासिक व्यापार मेले में आखिरकार 18 दिन बाद सरकार ने वाहनों की खरीदी पर रोड टैक्स में 50 फीसदी छूट को मंजूरी दे दी है। यह फैसला मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में लंबी बहस और राजनीतिक दबाव के बाद लिया गया।

दरअसल, कैबिनेट बैठक में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्रियों ने पूरे दमखम के साथ टैक्स छूट की मांग उठाई। अफसरों ने कई तर्क दिए, लेकिन आखिरकार मंत्रियों के रुख के आगे प्रशासनिक तर्क कमजोर पड़ गए।


अफसरों के तर्क, मंत्रियों का दबाव

कैबिनेट में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने कहा कि जीएसटी पहले ही कम हो चुका है, जिससे 10 लाख तक की गाड़ी पर करीब 1 लाख रुपए का फायदा मिल रहा है। ऐसे में अलग से राज्य कर में छूट देना राजस्व के लिए नुकसानदायक होगा।

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी आंकड़े रखते हुए बताया कि ग्वालियर और उज्जैन मेलों में टैक्स छूट देने से सरकार को 250 से 300 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है।

लेकिन सिंधिया खेमे से जुड़े मंत्री—

  • जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट
  • खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत
  • ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर

छूट के पक्ष में अड़े रहे। मंत्री तोमर ने कहा कि अगर छूट नहीं दी गई तो गाड़ियां बिकेंगी ही नहीं, फिर नुकसान कैसा? वहीं तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत ने इसे वर्षों से चली आ रही परंपरा बताया।


18 दिन की देरी से बढ़ा विवाद

गौरतलब है कि ग्वालियर और उज्जैन मेलों के लिए रोड टैक्स में छूट आमतौर पर एक साथ घोषित होती है। लेकिन 25 दिसंबर को शुरू हुए ग्वालियर मेले में 12 जनवरी तक छूट का कोई आदेश नहीं आया।

इस देरी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। लोगों और व्यापारियों में यह बात फैलने लगी कि सिंधिया के क्षेत्र होने के कारण ग्वालियर मेले को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है ताकि उज्जैन मेले को फायदा मिल सके।

डीलर्स स्टॉक मंगा चुके थे, ग्राहक बुकिंग कर चुके थे, लेकिन टैक्स छूट न होने से बिक्री पर असर पड़ रहा था।


मुख्यमंत्री ने दिया अंतिम फैसला

लंबी चर्चा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों मेलों—

  • ग्वालियर व्यापार मेला 2026
  • उज्जैन विक्रमोत्सव व्यापार मेला 2026

में वाहनों पर 50 प्रतिशत रोड टैक्स छूट को मंजूरी दे दी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि वाहन वास्तव में मेले से ही खरीदे-बेचे जाएं, सिर्फ कागजी दिखावा न हो।


मेलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा

पहले केवल ग्वालियर मेला ही वाहनों पर 50% टैक्स छूट के लिए जाना जाता था। इसी वजह से यहां प्रदेश और बाहर से भी लोग गाड़ी खरीदने आते थे।

अब उज्जैन मेले में भी यही सुविधा मिलने लगी है, जिससे दोनों मेलों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल बन गया है।
उज्जैन मेले में पूरे प्रदेश के डीलर गाड़ियां बेच सकते हैं, जबकि ग्वालियर में सिर्फ ग्वालियर संभाग के डीलरों को ही अनुमति है।

इसलिए टैक्स छूट में देरी को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही थी कि कहीं ग्वालियर का कारोबार उज्जैन की ओर शिफ्ट न हो जाए।


निष्कर्ष

18 दिन की राजनीतिक खींचतान के बाद आखिरकार सिंधिया गुट के दबाव में सरकार को झुकना पड़ा और ग्वालियर व्यापार मेले में वाहनों पर 50% रोड टैक्स छूट को मंजूरी मिल गई। इससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को बड़ी राहत मिली है और मेले की रौनक अब फिर से लौटने की उम्मीद है।

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