drnewsindia.com
भोपाल: मध्यप्रदेश में कुदरत की दोहरी मार देखने को मिल रही है। चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और द्रोणिका के असर से प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। खासकर गेहूं और चने की तैयार होती फसलों पर मौसम की इस बेरुखी का सबसे बुरा असर पड़ा है।
कहां-कहां बरसी आफत? (पिछले 48 घंटे)
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मंगलवार और बुधवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला रहा:
| क्षेत्र | प्रभावित जिले | स्थिति |
| मालवा-निमाड़ | इंदौर, उज्जैन, रतलाम, खंडवा | तेज हवा और बारिश |
| महाकौशल/मध्य | छिंदवाड़ा, सिवनी, बैतूल, सीहोर, रायसेन | अचानक बदला मौसम |
| ग्वालियर-चंबल | श्योपुर, शिवपुरी, ग्वालियर | ओलावृष्टि और बूंदाबांदी |
| बुंदेलखंड/विंध्य | टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली | ओलावृष्टि से फसलों को क्षति |
फसलों पर संकट: गेहूं और चना सबसे ज्यादा प्रभावित
लगातार बदल रहे आसमान के मिजाज ने अन्नदाताओं की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं:
- खेतों में भरा पानी: कई इलाकों में ओले गिरने से खड़ी फसलें बिछ गई हैं।
- क्वालिटी का डर: बेमौसम बारिश से गेहूं की चमक कम होने और चने में इल्ली या सड़न का खतरा बढ़ गया है।
- नुकसान का आंकलन: शिवपुरी, टीकमगढ़ और सीधी जैसे जिलों में ओलावृष्टि ने सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया है।
सावधान! 27 फरवरी से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, राहत अभी अस्थायी है।
- पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): 27 फरवरी को हिमालयी क्षेत्र में एक नया सिस्टम एक्टिव होगा।
- मार्च की शुरुआत में बारिश: इसका असर मध्यप्रदेश में 1 और 2 मार्च को दिखाई दे सकता है, जिससे फिर से बूंदाबांदी या हल्की बारिश की संभावना है।
- तात्कालिक राहत: बुधवार को आसमान साफ रहने के संकेत हैं, जिससे किसानों को कटी हुई फसलों को सुरक्षित करने का थोड़ा समय मिल सकता है।




