भोजपुर मंदिर में ‘वरमाला’ पर बवाल: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नवविवाहित जोड़े और सुरक्षाकर्मियों का विवाद

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drnewsindia.com

रायसेन/भोपाल। विश्व प्रसिद्ध और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित प्राचीन भोजपुर शिव मंदिर एक बार फिर चर्चा में है। इस बार कारण कोई पुरातात्विक खोज नहीं, बल्कि एक नवविवाहित युवक और मंदिर के सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई तीखी बहस है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें युवक मंदिर परिसर में वरमाला की रस्म रोकने पर सवाल उठा रहा है।

“भगवान के मंदिर में भी परमिशन?” – युवक का दर्द

वीडियो में खुद को भूपेंद्र शर्मा बताने वाला युवक अपनी पत्नी के साथ नजर आ रहा है। युवक का आरोप है कि वह विवाह के बाद केवल दो मिनट के लिए भगवान शिव के समक्ष वरमाला की रस्म और दर्शन करने पहुँचा था।

युवक ने वीडियो में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:

“हम केवल 30 सेकंड की रस्म करना चाहते थे। हमने ढोल और कैमरा बाहर ही छोड़ दिया था। लेकिन यहाँ सुरक्षाकर्मी एएसआई की अनुमति की बात कर रहे हैं। अगर महादेव के मंदिर में भी भगवान के सामने अर्धांगिनी को अपनाने के लिए परमिशन लेनी पड़े, तो यह कैसा न्याय है?”

बहस के अंत में युवक ने ‘हर हर महादेव’ के नारे लगाते हुए अपनी पत्नी को वरमाला पहनाई।

पुजारी पक्ष: “हमें आपत्ति नहीं, लेकिन नियम एएसआई के हैं”

मंदिर के पुजारी अनूप गिरी ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भोजपुर मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन एक ‘संरक्षित स्मारक’ है। मंदिर ट्रस्ट या पुजारियों को इस रस्म से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन परिसर की सुरक्षा और नियम एएसआई के सुरक्षाकर्मियों के हाथ में होते हैं।

एएसआई (ASI) का तर्क: संरक्षित स्मारक के नियम हैं सख्त

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भोजपुर मंदिर, सांची और खजुराहो की तरह ही एक ‘सेंट्रल प्रोटेक्टेड मॉन्यूमेंट’ है। नियमों के मुताबिक:

  • आयोजन और रस्म: परिसर में किसी भी प्रकार की रस्म, सार्वजनिक आयोजन या कमर्शियल शूट के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
  • फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी: निजी और व्यावसायिक शूटिंग के लिए निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क लागू होते हैं।
  • सुरक्षा: स्मारक की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बिना अनुमति के भीड़ या रस्मों को रोका जाता है।

क्या रस्म ‘आयोजन’ की श्रेणी में आती है?

यह विवाद अब एक बड़ी बहस का रूप ले रहा है। आम लोगों का मानना है कि दर्शन और संक्षिप्त वरमाला जैसी धार्मिक रस्मों को ‘इवेंट’ की श्रेणी में नहीं रखना चाहिए। वहीं, अधिकारियों का तर्क है कि बिना नियमों के ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा और मर्यादा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।

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