MP Politics: ‘पहलवान मुख्यमंत्री अफसरों के आगे बेबस’, जीतू पटवारी ने ‘कृषक कल्याण वर्ष’ पर उठाए गंभीर सवाल

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drnewsindia.com

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने सरकार के “कृषक कल्याण वर्ष” को महज एक दिखावा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश का अन्नदाता अपनी फसलों के वाजिब दाम के लिए भटक रहा है।

“मुख्यमंत्री पहलवान, पर अफसरों के दांव के आगे फेल”

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के व्यक्तिगत जीवन का हवाला देते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा:

“मुख्यमंत्री जी अपने शुरुआती जीवन में उज्जैन के जाने-माने पहलवान रहे हैं, लेकिन आज वे प्रशासनिक अफसरों के ‘दांव-पेच’ के आगे बेबस नजर आते हैं। सरकार कमजोर है और अफसरशाही हावी है।”

पटवारी ने नसीहत दी कि मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था पर लगाम कसनी चाहिए।


वादों और हकीकत का अंतर: उज्जैन मंडी का दिया हवाला

कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा के चुनावी घोषणापत्र (संकल्प पत्र) और वर्तमान स्थिति की तुलना करते हुए कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:

फसलभाजपा का वादा (प्रति क्विंटल)वर्तमान स्थिति (दावा)
गेहूं₹2700₹1800 – ₹1900
धान₹3100वादे से काफी कम
सोयाबीन₹6000बाजार में उचित दाम नहीं

पटवारी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र उज्जैन की मंडी में गेहूं महज 1800-1900 रुपये में बिक रहा है। उन्होंने इसका वीडियो साक्ष्य होने की बात भी कही।


कृषि विभाग में 60% पद खाली, कैसे होगा कल्याण?

पटवारी ने विभाग की आंतरिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आधारभूत ढांचा ही खोखला है, तो किसानों का भला कैसे होगा?

  • स्टाफ की कमी: कृषि विभाग में लगभग 60% पद रिक्त पड़े हैं।
  • प्रभावित व्यवस्था: पद खाली होने से योजनाओं का क्रियान्वयन और तकनीकी सहायता किसानों तक नहीं पहुँच पा रही है।
  • आरोप: “कृषक कल्याण वर्ष” सिर्फ कागजों और विज्ञापनों तक सीमित है, जमीन पर तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।

मुख्य बिंदु जो चर्चा में हैं:

  • सरकारी दावों के विपरीत मंडियों में कम दाम पर फसल खरीदी।
  • प्रशासनिक अफसरों का सरकार पर हावी होना।
  • कृषि विभाग में बड़े पैमाने पर खाली पद।

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