कृषि और ग्रामीण परिवर्तन पर बजट पश्चात वेबिनार में बोले प्रधानमंत्री

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हाई वैल्यू एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी और एक्सपोर्ट पर दिया जोर

drnewsindia.com/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने “कृषि और ग्रामीण परिवर्तन” विषय पर आयोजित बजट पश्चात वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि बजट के प्रावधानों का पूरा लाभ देश को मिले, इसके लिए विशेषज्ञों, उद्योग जगत और किसानों के सुझाव बेहद महत्वपूर्ण हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वेबिनार सीरीज का तीसरा कार्यक्रम है। इससे पहले टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर चर्चा हो चुकी है। उन्होंने बताया कि बजट निर्माण में देशभर के विशेषज्ञों के सुझाव शामिल किए गए हैं और अब लक्ष्य है कि बजट के प्रावधानों को तेजी से जमीन पर उतारा जाए।

किसानों को मिली आर्थिक सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लगभग 10 करोड़ किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि एमएसपी में सुधारों से किसानों को लागत से डेढ़ गुना तक अधिक मूल्य मिल रहा है। वहीं संस्थागत ऋण का दायरा 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान किया गया है, जिससे किसानों का जोखिम कम हुआ है।

एक्सपोर्ट ओरिएंटेड खेती पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार तेजी से बदल रहा है और भारत को अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाना होगा। भारत के विविध जलवायु क्षेत्र (एग्रो क्लाइमेटिक जोन) कृषि के लिए बड़ी ताकत हैं।

उन्होंने कहा कि इस बजट में हाई वैल्यू एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसे उत्पादों के क्षेत्रीय विकास की योजना बनाई गई है। खासतौर पर केरल और तमिलनाडु में नारियल उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

ऑर्गेनिक और नेचुरल फार्मिंग की बढ़ती मांग

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया हेल्थ और ऑर्गेनिक फूड की ओर तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए केमिकल फ्री और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इससे भारतीय किसानों के लिए वैश्विक बाजार में नए अवसर खुलेंगे। इसके लिए सर्टिफिकेशन और लैब जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर भी सरकार काम कर रही है।

फिशरीज और पशुपालन में बड़ी संभावनाएं

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, लेकिन इस क्षेत्र में अभी भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। वर्तमान में करीब 4 लाख टन उत्पादन होता है, जबकि 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है।

उन्होंने कहा कि अगर इस क्षमता का उपयोग किया जाए तो मछुआरों की आय में बड़ा सुधार हो सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

इसके अलावा पशुपालन को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। पशुओं के स्वास्थ्य और बेहतर नस्ल के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है।

टेक्नोलॉजी से बदलेगी कृषि की तस्वीर

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि में टेक्नोलॉजी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। e-NAM प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को देशभर के बाजारों तक पहुंच मिल रही है।

उन्होंने बताया कि एग्रीस्टैक और किसान आईडी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किए जा रहे हैं। अब तक करीब 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बनाई जा चुकी है और 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे पूरा किया जा चुका है।

ग्रामीण समृद्धि के लिए सरकार प्रतिबद्ध

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।

उन्होंने बताया कि लखपति दीदी अभियान के तहत अब तक 3 करोड़ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है और 2029 तक 3 करोड़ और महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि वेबिनार में सामने आने वाले सुझावों से बजट के प्रावधानों को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

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