खत्म होगी LPG की किल्लत! UAE दौरे पर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी डील कर सकते हैं PM मोदी

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drnewsindia.com/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi 15 से 20 मई 2026 तक पांच देशों के महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरे की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात यानी United Arab Emirates से होगी। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सुरक्षा, एलपीजी सप्लाई और कच्चे तेल को लेकर बड़े समझौते हो सकते हैं। ऐसे में देश में एलपीजी की संभावित किल्लत को कम करने की दिशा में यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा फोकस

विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। इसमें ऊर्जा सहयोग सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहेगा। भारत और यूएई पिछले कुछ वर्षों में तेल और गैस क्षेत्र में लगातार साझेदारी बढ़ा रहे हैं।

LPG और कच्चे तेल की सप्लाई पर हो सकती है बड़ी बातचीत

सूत्रों के मुताबिक भारत यूएई से एलपीजी और कच्चे तेल की स्थिर और दीर्घकालिक सप्लाई सुनिश्चित करने पर जोर दे सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन पर असर के बीच भारत अपने ऊर्जा स्रोतों को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

भारत पहले से ही यूएई के साथ कच्चे तेल की आपूर्ति, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में निवेश और ऊर्जा व्यापार को लेकर कई समझौतों पर काम कर चुका है। अब एलपीजी आपूर्ति को लेकर नए करार होने की संभावना जताई जा रही है।

किन देशों के दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी?

प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे में यूएई के अलावा Netherlands, Sweden, Norway और Italy का भी दौरा करेंगे। इन यात्राओं में व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और रक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

क्यों अहम है यह दौरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत अपने ऊर्जा आयात को सुरक्षित और स्थिर बनाने की कोशिश कर रहा है। यूएई भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में से एक है, ऐसे में यह दौरा घरेलू गैस और ईंधन सप्लाई के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे क्या?

यदि इस दौरे में एलपीजी और ऊर्जा सप्लाई को लेकर बड़े समझौते होते हैं तो आने वाले समय में भारत को गैस सप्लाई स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता और कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

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