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इंदौर: शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 36 मौतों की त्रासदी को दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन यहाँ के हालात अब भी सामान्य नहीं हो सके हैं। नगर निगम ने नई नर्मदा लाइन तो बिछा दी है, लेकिन आर्थिक तंगी और खुदाई के भारी खर्च के कारण बड़ी संख्या में रहवासी सुरक्षित कनेक्शन लेने में असमर्थ हैं।
⚠️ स्थिति का विश्लेषण: त्रासदी के बाद का संकट
भले ही प्रशासन ने पाइपलाइन बिछाने का काम किया है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है:
- आर्थिक बोझ: नया कनेक्शन लेने के लिए रहवासियों को अपने आंगन और हौज के पास खुदाई करानी होगी, जिसमें भारी खर्च आ रहा है। गरीबी के कारण लोग इससे बच रहे हैं।
- अस्थाई कनेक्शन का खतरा: कई घरों में नीले पाइपों के जरिए अस्थाई रूप से पानी पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोबारा सीवेज और गंदगी मिलने का खतरा बना रहेगा।
- सड़कों की बदहाली: खुदाई के बाद गलियों में पेंचवर्क नहीं हुआ है, जिससे आवाजाही मुश्किल हो गई है।
📊 भागीरथपुरा त्रासदी: अब तक क्या हुआ?
दो महीने पहले फैली डायरिया और हैजा की महामारी ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था।
| विवरण | आंकड़े/स्थिति |
| कुल मौतें | 36 |
| बीमारों की संख्या | 1000 से अधिक |
| अस्पताल में भर्ती | 450+ लोग |
| वर्तमान स्थिति | मामला कोर्ट में, जांच आयोग गठित |
🗣️ रहवासियों का दर्द: “टैंकर भी नहीं पहुँच पा रहे”
स्थानीय निवासी मदन यादव के अनुसार, बस्ती के लोग दोहरे संकट में हैं। एक तरफ नई लाइन से जुड़ने का खर्च है, तो दूसरी तरफ पुरानी गलियां इतनी संकरी हैं कि वहां पीने के पानी के टैंकर भी नहीं पहुँच पा रहे हैं।
जांच आयोग की कार्रवाई:
इस पूरे मामले पर कोर्ट सख्त है। गठित आयोग ने दूषित पेयजल कांड को लेकर साक्ष्य (Evidence) मांगे हैं ताकि दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
📍 मुख्य मांगें:
- कनेक्शन की प्रक्रिया को सस्ता और सरल बनाया जाए।
- संकरी गलियों में छोटे टैंकरों के जरिए जलापूर्ति सुनिश्चित हो।
- खुदी हुई सड़कों का तुरंत पेंचवर्क किया जाए।
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